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Jaipur: Judicial action on school vehicles

जयपुर: स्कूल वाहनों पर न्यायिक कार्रवाई जयपुर शहर में स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने वाले परिवहन वाहनों की सुरक्षा जांच से संबंधित एक विशेष अभियान का विवरण देता है। यह कार्रवाई जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिवों (जजों), क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) और ट्रैफिक पुलिस की संयुक्त टीमों द्वारा सुबह के समय सड़कों पर की गई थी। जांच के दौरान यह सामने आया कि लगभग किसी भी वाहन ने 21 निर्धारित सुरक्षा बिंदुओं का पूरी तरह पालन नहीं किया था, जिसमें आपातकालीन निकास, जीपीएस सिस्टम और फर्स्ट एड किट जैसी मूलभूत सुविधाएं नदारद थीं। कई वाहनों में ड्राइवर के साथ बच्चों को चढ़ाने-उतारने के लिए सहायक मौजूद नहीं थे, और क्षमता से अधिक बच्चे बिठाए गए थे। नियमों का उल्लंघन करने वाले ड्राइवरों पर मौके पर ही चालान (जुर्माना) किया गया, जबकि 15 साल की अवधि पार कर चुके वाहनों सहित क्षमता से अधिक बच्चे ले जा रहे कुछ वाहनों को जब्त करने का निर्देश दिया गया। यह निरीक्षण राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) के आदेश पर किया गया था, जिसने सभी जिला प्राधिकरणों को साल में कम से कम तीन बार अनिवार्य निरीक्षण करने का निर्देश दिया है। स्कूल परिवहन अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु किस स्तर की न्यायिक निगरानी अनिवार्य की गई है? स्कूल परिवहन अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (जिसके सचिव जज होते हैं) द्वारा न्यायिक निगरानी अनिवार्य की गई है। अनिवार्य न्यायिक निगरानी का स्तर और आवधिकता निम्नलिखित है: 1. वार्षिक निरीक्षण (Annual Inspection): ◦ रालसा ने प्रदेश के सभी जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों को यह निर्देश दिया है कि वे एक साल में कम से कम तीन बार स्कूल वाहनों का निरीक्षण करें। ◦ इन निरीक्षणों की वार्षिक रिपोर्ट 10 अप्रैल, 10 अगस्त, और 10 दिसंबर तक रालसा को भिजवानी अनिवार्य है। 2. मासिक निरीक्षण (Monthly Inspection): ◦ वार्षिक निरीक्षणों के अलावा, हर महीने भी निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। ◦ मासिक निरीक्षण की रिपोर्ट माह की 15 तारीख तक भिजवाने के निर्देश दिए गए हैं। जयपुर शहर में, यह निरीक्षण जज मोबाइल मजिस्ट्रेट, आरटीओ (RTO), और ट्रैफिक पुलिस की टीम के साथ मिलकर किया जाता है। उदाहरण के लिए, जयपुर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण प्रथम के सचिव दीपेंद्र माथुर और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वितीय की सचिव पल्लवी शर्मा ने स्कूल वाहनों की जांच की। निरीक्षण के बाद, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अपनी रिपोर्ट राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) को सौंपता है। निरीक्षण के दौरान आवश्यक सुरक्षा मानकों पर समग्र गैर-अनुपालन की सीमा क्या उजागर हुई? निरीक्षण के दौरान आवश्यक सुरक्षा मानकों पर समग्र गैर-अनुपालन की सीमा अत्यंत व्यापक उजागर हुई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने वाहनों का 21 पॉइंट पर निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के नतीजों से यह पता चला कि एक भी वाहन ऐसा नहीं मिला, जिसने सभी नियमों की पालना पूरी की हो। जांच में सामने आए गैर-अनुपालन के प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं: • समग्र अनुपालन निरीक्षण के लिए निर्धारित 21 बिंदुओं में से, एक भी वाहन ऐसा नहीं था जो सभी मानकों को पूरा करता हो। • आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) वैन और ऑटो में आपातकालीन निकास की कोई व्यवस्था ही नहीं मिली। • जीपीएस ट्रैकिंग किसी भी वाहन में जीपीएस नहीं लगा था, जिससे स्कूल उन्हें ट्रैक कर सकें। • फर्स्ट एड किट एक-दो वाहनों को छोड़कर किसी में भी फर्स्ट एड किट नहीं मिला। • सहायक (अटेंडेंट) की अनुपस्थिति नियमों के तहत ड्राइवर के साथ सहायक का मौजूद होना अनिवार्य है, लेकिन ज्यादातर वाहनों में सहायक मौजूद ही नहीं था। इन वाहनों का संचालन केवल ड्राइवर के भरोसे हो रहा था। • वाहनों का ज़ब्त किया जाना गंभीर उल्लंघनों के कारण वाहनों को जब्त करने के निर्देश दिए गए। इनमें 15 साल की अवधि पार कर चुके वाहन शामिल थे। • क्षमता से अधिक बच्चे एक वैन में कैपेसिटी से ज्यादा बच्चे पाए गए, जिसके कारण उस वैन को भी जब्त किया गया। • अन्य दस्तावेजी और सुरक्षा उल्लंघन कई चालान काटे गए क्योंकि स्कूल वैन और ऑटो में पीली स्ट्रिप नहीं थी। इसके अलावा, कुछ मामलों में ड्राइवर के पास लाइसेंस नहीं था, वह वर्दी में नहीं था, और बस के कागजात नहीं थे। संक्षेप में, निरीक्षण किए गए वाहनों में सुरक्षा नियमों का पालन आंशिक या न के बराबर था, जिसका प्रमाण यह है कि 21 निरीक्षण बिंदुओं में से एक भी वाहन पूर्ण रूप से अनुपालन नहीं कर पाया। अनिवार्य वार्षिक निरीक्षण रिपोर्टें वाहन सुरक्षा मानकों में दीर्घकालिक सुधार कैसे सुनिश्चित करेंगी? अनिवार्य निरीक्षण रिपोर्टें वाहन सुरक्षा मानकों में दीर्घकालिक सुधार सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं क्योंकि वे लगातार निगरानी, जवाबदेही और प्रवर्तन की एक संरचित प्रणाली स्थापित करती हैं। स्रोत में उपलब्ध जानकारी के आधार पर, यह प्रक्रिया निम्नलिखित तरीकों से दीर्घकालिक सुधारों को सुनिश्चित करती है: 1. निरंतर और अनिवार्य निरीक्षण आवृत्ति राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) ने वाहन सुरक्षा मानकों में सुधार सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण की उच्च आवृत्ति अनिवार्य की है। • साल में तीन बार अनिवार्य निरीक्षण: रालसा ने प्रदेश के सभी जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों (DLSA) को निर्देश दिया है कि वे स्कूल वाहनों का निरीक्षण साल में कम से कम तीन बार करें। • नियमित रिपोर्टिंग: इन निरीक्षणों की वार्षिक रिपोर्ट 10 अप्रैल, 10 अगस्त और 10 दिसंबर तक रालसा को भेजनी अनिवार्य है। • मासिक निगरानी: इसके अतिरिक्त, हर महीने होने वाले निरीक्षण की रिपोर्ट भी माह की 15 तारीख तक भिजवाने के निर्देश दिए गए हैं। यह निरंतर निरीक्षण और रिपोर्टिंग सुनिश्चित करता है कि वाहन मालिक और स्कूल लगातार नियमों का पालन करें, जिससे दीर्घकालिक लापरवाही की संभावना कम हो जाती है। 2. जवाबदेही और प्रवर्तन का तंत्र अनिवार्य रिपोर्टिंग तंत्र (DLSA से RALSA तक) और निरीक्षण के दौरान की गई कार्रवाई तत्काल और दीर्घकालिक सुधार दोनों को प्रेरित करती है: • उच्च स्तरीय रिपोर्टिंग: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अपनी निरीक्षण रिपोर्टें राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) को सौंपते हैं। यह रालसा को राज्यव्यापी सुरक्षा मानकों की निगरानी करने और समय के साथ प्रगति को ट्रैक करने की अनुमति देता है। • तत्काल कार्रवाई: निरीक्षण टीमें, जिनमें जज मोबाइल मजिस्ट्रेट, आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस शामिल हैं, मौके पर ही नियमों का पालन नहीं करने वाले ड्राइवरों के चालान काटती हैं। • वाहनों की जब्ती: गंभीर नियमों का उल्लंघन करने पर वाहनों को जब्त किया जाता है। उदाहरण के लिए, 15 साल की अवधि पार कर चुके वाहनों को बच्चों को लाने-ले जाने के काम में इस्तेमाल करने पर जब्त किया गया। क्षमता (सिटिंग कैपेसिटी) से ज़्यादा बच्चे होने पर भी वैन जब्त की गई। यह तत्काल प्रवर्तन वाहन मालिकों को नियमों का पालन करने के लिए मजबूर करता है। 3. विशिष्ट सुरक्षा मानकों पर ध्यान केंद्रित करना अनिवार्य निरीक्षणों के माध्यम से बार-बार उन 21 महत्वपूर्ण सुरक्षा बिंदुओं की जांच की जाती है, जहां अक्सर कमी पाई जाती है। दीर्घकालिक सुधार तब होता है जब इन कमियों को व्यवस्थित रूप से दूर किया जाता है: • आपातकालीन निकास (Emergency Exit): निरीक्षणों में पाया गया कि वैन और ऑटो में आपातकालीन निकास की कोई व्यवस्था नहीं थी। नियमित निरीक्षण इस मानक को अनिवार्य कर देगा। • सहायक की उपलब्धता: नियमों के तहत ड्राइवर के साथ सहायक का होना अनिवार्य है ताकि बच्चों को चढ़ाने और उतारने में आसानी हो, लेकिन अधिकांश वाहनों में सहायक मौजूद नहीं थे। नियमित निरीक्षण इस नियम के पालन को सुनिश्चित करेगा। • अन्य सुरक्षा उपकरण: यह सुनिश्चित करना कि वाहनों में फर्स्ट एड किट, जीपीएस (ताकि स्कूल उन्हें ट्रैक कर सकें), वैध लाइसेंस और कागजात, और पीली स्ट्रिप मौजूद हों। दीर्घकालिक सुधार इसलिए सुनिश्चित होते हैं क्योंकि नियमित निरीक्षण से प्राप्त डेटा और रिपोर्टें रालसा को यह समझने में मदद करती हैं कि कौन से नियम लगातार तोड़े जा रहे हैं, और प्रवर्तन एजेंसियां (आरटीओ, ट्रैफिक पुलिस) इन कमजोरियों पर लगातार ध्यान केंद्रित कर सकती हैं। -------------------------------------------------------------------------------- उपमा: अनिवार्य वार्षिक निरीक्षण रिपोर्टों को एक थर्मामीटर और नियमित डोज वाली दवा के रूप में देखा जा सकता है। थर्मामीटर (निरीक्षण रिपोर्ट) नियमित रूप से रोगी (सुरक्षा मानक) के तापमान को मापता है और दिखाता है कि वह स्वस्थ है या नहीं (जैसे 21 बिंदुओं पर पालन हुआ या नहीं)। जबकि नियमित डोज (साल में तीन बार और मासिक निरीक्षण) यह सुनिश्चित करती है कि बीमारी (सुरक्षा उल्लंघन) वापस न आए और रोगी दीर्घकालिक स्वास्थ्य (उत्कृष्ट सुरक्षा मानक) बनाए रखे। स्कूल वाहनों का वार्षिक निरीक्षण कितनी बार अनिवार्य है? स्कूल वाहनों का वार्षिक निरीक्षण एक साल में कम से कम तीन बार अनिवार्य किया गया है। यह निर्देश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) ने प्रदेश के सभी जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों को दिए हैं। इन अनिवार्य वार्षिक निरीक्षणों की रिपोर्ट निम्नलिखित तिथियों तक रालसा को भिजवानी होती है: 1. 10 अप्रेल 2. 10 अगस्त 3. 10 दिसंबर इसके अलावा, हर महीने होने वाले निरीक्षण की रिपोर्ट माह की 15 तारीख तक भिजवाने के निर्देश भी दिए गए हैं। वैन और ऑटो में कौन सी सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी? आपके प्रश्न के अनुसार, वैन और ऑटो में निरीक्षण के दौरान निम्नलिखित सुरक्षा व्यवस्था और अनुपालन (compliances) नहीं पाए गए थे: 1. आपातकालीन निकास (Emergency Exit): वैन और ऑटो में आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) की कोई व्यवस्था ही नहीं मिली थी। 2. पीली स्ट्रिप (Yellow Strip): स्कूल वैन और ऑटो में पीली स्ट्रिप नहीं होने के कारण भी उनके चालान काटे गए। इसके अतिरिक्त, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा 21 बिंदुओं पर किए गए निरीक्षण में अन्य स्कूल वाहनों (जिनमें वैन और ऑटो भी शामिल थे) में भी कई महत्वपूर्ण सुरक्षा व्यवस्थाएँ नहीं मिलीं: • जीपीएस (GPS): किसी भी वाहन में जीपीएस नहीं लगा था, जिससे स्कूल उन्हें ट्रैक कर सके। • फर्स्ट एड किट: एक-दो वाहन छोड़कर किसी में भी फर्स्ट एड किट नहीं मिला। • सहायक (Assistant): नियमों के तहत ड्राइवर के साथ सहायक का मौजूद होना अनिवार्य होता है, लेकिन ज्यादातर वाहनों में सहायक मौजूद ही नहीं था। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि एक भी वाहन ऐसा नहीं मिला, जिसने सभी 21 नियमों की पालना पूरी की हो। इस जांच में जज मोबाइल मजिस्ट्रेट, आरटीओ, और ट्रैफिक पुलिस की टीम शामिल थी। बनीपार्क में किन कारणों से वाहनों को जब्त किया गया? आपके स्रोतों के अनुसार, बनीपार्क में स्कूल वाहनों को जब्त करने के मुख्य रूप से दो कारण उजागर हुए: 1. 15 साल की अवधि पार कर चुके वाहन का उपयोग: ◦ बनीपार्क में चिल्ड्रन एकेडमी (Children Academy) में एक ऐसा वाहन बच्चों को लाने-ले जाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था, जिसने अपनी 15 साल की अवधि पार कर ली थी। ◦ जज पल्लवी शर्मा ने मौके पर ही इस वाहन को जब्त करने के निर्देश दिए। 2. क्षमता से अधिक बच्चे (ओवरलोडिंग): ◦ बनीपार्क में माहेश्वरी पब्लिक स्कूल (Maheshwari Public School) की एक वैन में उसकी निर्धारित कैपेसिटी से ज्यादा बच्चे पाए गए। ◦ क्षमता से अधिक बच्चे होने के कारण इस वैन को भी जब्त किया गया। आरटीओ (RTO) और ट्रैफिक पुलिस की टीम ने इन वाहनों को जब्त करने की कार्रवाई की। जज पल्लवी शर्मा ने बनीपार्क में स्कूल वैन में सिटिंग कैपेसिटी के अनुसार बच्चों की संख्या की जांच करवाई थी। बनीपार्क में किन कारणों से वाहनों को जब्त किया गया? बनीपार्क में स्कूल वाहनों को जब्त करने के मुख्य रूप से दो कारण उजागर हुए, जिनकी जाँच जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वितीय की सचिव जज पल्लवी शर्मा ने करवाई: 1. 15 साल की अवधि पार कर चुके वाहन का उपयोग: ◦ चिल्ड्रन एकेडमी (Children Academy) में एक वाहन बच्चों को लाने-ले जाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था जिसने 15 साल की अवधि पार कर ली थी। ◦ जज पल्लवी शर्मा ने नियमों का उल्लंघन होने पर मौके पर ही इस वाहन को जब्त करने के निर्देश दिए। 2. क्षमता से अधिक बच्चे होना (Overcrowding): ◦ माहेश्वरी पब्लिक स्कूल की एक वैन में उसकी सिटिंग कैपेसिटी से ज्यादा बच्चे पाए गए। ◦ क्षमता से अधिक बच्चे होने के कारण इस वैन को भी जब्त कर लिया गया। वाहनों को जब्त करने की कार्रवाई आरटीओ (RTO) और ट्रैफिक पुलिस की टीम ने की थी। बनीपार्क में किन कारणों से वाहनों को जब्त किया गया? बनीपार्क में स्कूल वाहनों को जब्त करने के दो मुख्य कारण उजागर हुए, जब जज पल्लवी शर्मा ने चिल्ड्रन एकेडमी और माहेश्वरी पब्लिक स्कूल के वाहनों की जांच करवाई [i]: 1. 15 साल की अवधि पार कर चुके वाहन: ◦ चिल्ड्रन एकेडमी में एक ऐसे वाहन का उपयोग बच्चों को लाने और ले जाने के लिए किया जा रहा था जिसने 15 साल की अवधि पार कर ली थी [i]। ◦ जज पल्लवी शर्मा ने मौके पर ही इस वाहन को जब्त करने के निर्देश दिए [i]। 2. क्षमता से अधिक बच्चे (Overloading): ◦ माहेश्वरी पब्लिक स्कूल की एक वैन में उसकी बैठने की कैपेसिटी से ज्यादा बच्चे पाए गए थे [i]। ◦ इस वैन को भी नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर जब्त कर लिया गया [i]। आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस की टीम ने बनीपार्क में इन वाहनों को जब्त करने की कार्रवाई पूरी की [i]। जयपुर में स्कूल वाहनों की जांच किसने की? जयपुर में स्कूल वाहनों की जांच जज मोबाइल मजिस्ट्रेट, आरटीओ (RTO), और ट्रैफिक पुलिस की टीम ने मिलकर की थी। यह कार्रवाई राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) के निर्देश पर की गई थी, जिसके तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिवों (जज) ने जयपुर शहर में स्कूल वाहनों को चेक किया। जांच करने वाले प्रमुख अधिकारी (जज) निम्नलिखित थे: • दीपेंद्र माथुर: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण प्रथम के सचिव। उन्होंने न्यू सांगानेर रोड पर स्कूल वैन को रुकवाकर निरीक्षण किया। • पल्लवी शर्मा: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वितीय की सचिव। उन्होंने बनीपार्क में स्कूल वैन में बैठने की क्षमता के अनुसार बच्चों की संख्या की जांच करवाई। इस टीम ने सोमवार सुबह 7 बजे सड़कों पर उतरकर शहर के कई स्कूलों में बच्चों को लाने वाली बस, वैन और ऑटोरिक्शा की जांच की। निरीक्षण के बाद, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अपनी रिपोर्ट राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) को सौंपेगा। स्कूल वाहनों में मुख्य कौन-सी कमियां पाई गईं? स्कूल वाहनों के निरीक्षण के दौरान आवश्यक सुरक्षा मानकों के संबंध में कई मुख्य कमियाँ पाई गईं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा 21 बिंदुओं पर वाहनों का निरीक्षण किया गया, और यह पाया गया कि एक भी वाहन ऐसा नहीं मिला, जिसने सभी नियमों की पालना पूरी की हो। निरीक्षण के दौरान पाई गईं मुख्य कमियाँ निम्नलिखित हैं: 1. सुरक्षा उपकरण और व्यवस्था की कमी • आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) का न होना: वैन और ऑटो जैसे वाहनों में आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) की कोई व्यवस्था ही नहीं मिली। • जीपीएस (GPS) का न होना: किसी भी वाहन में जीपीएस नहीं लगा था, जिससे स्कूल इन्हें ट्रैक कर सकें। • फर्स्ट एड किट की अनुपस्थिति: एक-दो वाहन छोड़कर किसी में भी फर्स्ट एड किट नहीं मिला। 2. स्टाफ और दस्तावेज़ीकरण से संबंधित कमियाँ • सहायक (अटेंडेंट) की अनुपस्थिति: नियमों के तहत स्कूल वाहनों में ड्राइवर के साथ सहायक का मौजूद होना अनिवार्य है, जिससे बच्चों को बस में चढ़ाने और उतारने में आसानी हो सके, लेकिन ज्यादातर वाहनों में सहायक मौजूद ही नहीं था। इन वाहनों का संचालन केवल ड्राइवर के भरोसे हो रहा था। • ड्राइवर के दस्तावेज़ और वर्दी: मानसरोवर के मॉडर्न पब्लिक स्कूल में कुछ ड्राइवरों के पास लाइसेंस नहीं मिला, वे वर्दी में नहीं थे, और बस के कागजात नहीं होने के कारण भी चालान काटे गए। 3. कानूनी और क्षमता संबंधी उल्लंघन • क्षमता से अधिक बच्चे (ओवरलोडिंग): बनीपार्क में माहेश्वरी पब्लिक स्कूल की एक वैन में उसकी निर्धारित कैपेसिटी से ज्यादा बच्चे थे। इस वैन को जब्त भी किया गया। • वाहन की अवधि पार करना: बनीपार्क में चिल्ड्रन एकेडमी में एक वाहन 15 साल की अवधि पार कर चुका था और फिर भी बच्चों को लाने-ले जाने के काम में इस्तेमाल किया जा रहा था, जिसे मौके पर ही जब्त करने के निर्देश दिए गए। • पीली स्ट्रिप का न होना: स्कूल वैन और ऑटो में पीली स्ट्रिप नहीं होने के कारण भी उनके चालान काटे गए। स्कूल वाहनों में मुख्य कौन-सी कमियां पाई गईं? स्कूल वाहनों के निरीक्षण के दौरान 21 बिंदुओं पर जांच की गई, और यह पाया गया कि एक भी वाहन ऐसा नहीं मिला, जिसने सभी नियमों की पालना पूरी की हो। निरीक्षण में उजागर हुईं मुख्य कमियाँ निम्नलिखित हैं: 1. सुरक्षा उपकरणों और सुविधाओं का अभाव • आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) की अनुपस्थिति: वैन और ऑटो में आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) की कोई व्यवस्था ही नहीं मिली। • फर्स्ट एड किट का अभाव: एक-दो वाहन छोड़कर किसी में भी फर्स्ट एड किट नहीं मिला। • जीपीएस ट्रैकिंग की कमी: किसी भी वाहन में जीपीएस नहीं लगा था, जिससे स्कूल उन्हें ट्रैक कर सकें। 2. मानवीय सहायता और स्टाफ संबंधी कमियाँ • सहायक (अटेंडेंट) की अनुपस्थिति: नियमों के तहत ड्राइवर के साथ सहायक का मौजूद होना अनिवार्य है, जिससे बच्चों को बस में चढ़ाने और उतारने में आसानी हो सके, लेकिन ज्यादातर वाहनों में सहायक मौजूद ही नहीं था। इन वाहनों का संचालन केवल ड्राइवर के भरोसे हो रहा था। • गैर-वर्दी (Non-Uniform): मानसरोवर के मॉडर्न पब्लिक स्कूल में ड्राइवर वर्दी में नहीं था, जिसके लिए चालान काटे गए। 3. नियमों का उल्लंघन और दस्तावेज़ी कमियाँ • क्षमता से अधिक बच्चे (ओवरलोडिंग): बनीपार्क में माहेश्वरी पब्लिक स्कूल की एक वैन में कैपेसिटी से ज्यादा बच्चे पाए गए, जिसके कारण उस वैन को जब्त किया गया। • वाहन की अवधि सीमा का उल्लंघन: बनीपार्क में चिल्ड्रन एकेडमी में एक वाहन 15 साल की अवधि पार कर चुका था और बच्चों को लाने-ले जाने का काम कर रहा था, जिसे जब्त किया गया। • पीली स्ट्रिप की कमी: स्कूल वैन और ऑटो में पीली स्ट्रिप नहीं होने के कारण भी उनके चालान काटे गए। • लाइसेंस और कागजात का अभाव: मानसरोवर के मॉडर्न पब्लिक स्कूल में ड्राइवर के पास लाइसेंस नहीं मिलने और बस के कागजात नहीं होने के भी चालान मौके पर ही काटे गए। ये निरीक्षण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण प्रथम के सचिव दीपेंद्र माथुर और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वितीय की सचिव पल्लवी शर्मा ने जज मोबाइल मजिस्ट्रेट, आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस की टीम के साथ मिलकर किए थे। रालसा को वार्षिक निरीक्षण रिपोर्ट कब भेजनी होती है? स्कूल वाहनों के अनिवार्य निरीक्षण की वार्षिक रिपोर्ट राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) को निम्नलिखित तीन तिथियों तक भिजवानी होती है: 1. 10 अप्रेल 2. 10 अगस्त 3. 10 दिसंबर रालसा ने प्रदेश के सभी जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों को यह निर्देश दिया है कि वे एक साल में कम से कम तीन बार स्कूल वाहनों का निरीक्षण करें और यह वार्षिक रिपोर्ट इन निर्धारित तिथियों तक भिजवाएं। इसके अतिरिक्त, हर महीने होने वाले निरीक्षण की रिपोर्ट माह की 15 तारीख तक भिजवाने के निर्देश भी दिए गए हैं। वार्षिक निरीक्षण रिपोर्ट रालसा को कब भेजनी है? वार्षिक निरीक्षण रिपोर्टें राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) को एक साल में तीन बार निम्नलिखित तिथियों तक भिजवानी अनिवार्य हैं: 1. 10 अप्रेल 2. 10 अगस्त 3. 10 दिसंबर ये निर्देश रालसा ने प्रदेश के सभी जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों को दिए हैं, जिसमें यह सुनिश्चित किया गया है कि स्कूल वाहनों का निरीक्षण साल में कम से कम तीन बार किया जाए। इसके अतिरिक्त, हर महीने होने वाले निरीक्षण की रिपोर्ट भी माह की 15 तारीख तक रालसा को भिजवाने के निर्देश दिए गए हैं। वार्षिक निरीक्षण रिपोर्ट रालसा को कब भेजनी है? वार्षिक निरीक्षण रिपोर्ट राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) को निम्नलिखित तीन तिथियों तक भिजवानी होती है: 1. 10 अप्रेल 2. 10 अगस्त 3. 10 दिसंबर रालसा ने प्रदेश के सभी जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों को यह निर्देश दिया है कि वे साल में कम से कम तीन बार स्कूल वाहनों का निरीक्षण करें और इन तिथियों तक उनकी वार्षिक रिपोर्ट रालसा को भिजवाएँ। इसके अतिरिक्त, हर महीने होने वाले निरीक्षण की रिपोर्ट माह की 15 तारीख तक भिजवाने के निर्देश भी दिए गए हैं। हर महीने निरीक्षण रिपोर्ट कब तक भेजनी होती है? आपके स्रोतों के अनुसार, हर महीने होने वाले निरीक्षण की रिपोर्ट माह की 15 तारीख तक भिजवाने के निर्देश दिए गए हैं। यह रिपोर्ट जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों द्वारा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) को भेजी जाती है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने कितने बिंदुओं पर जांच की? जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) ने स्कूल वाहनों का निरीक्षण 21 बिंदुओं पर किया। हालांकि, निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि एक भी वाहन ऐसा नहीं मिला जिसने सभी 21 नियमों की पूरी तरह से पालना की हो। इन 21 बिंदुओं में आपातकालीन निकास, फर्स्ट एड किट, जीपीएस, सहायक की उपलब्धता और अन्य सुरक्षा मानक शामिल थे।

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