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ट्रंप के एक फैसले से जयपुर के जौहरी कंगाल:

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ट्रंप के एक फैसले से जयपुर के जौहरी कंगाल:

September 10, 2025

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कैसे अमेरिकी टैरिफ ने राजस्थान की 17,800 करोड़ की इंडस्ट्री को घुटनों पर ला दिया

Jaipur jewelry artisans working with gemstones in traditional workshop setting

जयपुर, जिसे दुनिया रंगीन रत्नों और पारंपरिक आभूषणों के वैश्विक केंद्र के रूप में जानती है, आज एक अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहा है। यह शहर, जो अपनी सदियों पुरानी कला और शिल्प कौशल के लिए प्रसिद्ध है, अब अपनी चमक खो रहा है। इस संकट की जड़ें जयपुर की गलियों में नहीं, बल्कि हजारों मील दूर वाशिंगटन में लिए गए एक राजनीतिक फैसले में हैं।

अमेरिका द्वारा लगाया गया भारी टैरिफ, जिसे "ट्रंप टैरिफ" के नाम से जाना जाता है, राजस्थान के जेम एंड ज्वैलरी उद्योग पर एक अप्रत्याशित कहर बनकर टूटा है। यह कहानी सिर्फ व्यापार के आंकड़ों की नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि कैसे वैश्विक राजनीति की एक लहर एक संपन्न स्थानीय उद्योग को तबाह कर सकती है और हजारों लोगों की रोजी-रोटी छीन सकती है। यह वैश्विक अंतरसंबंध और अनपेक्षित परिणामों की एक केस स्टडी है।

त्योहारी सीजन में 2500 करोड़ का सीधा नुकसान

इस अमेरिकी टैरिफ का वित्तीय प्रभाव चौंकाने वाला है। राजस्थान का जेम एंड ज्वैलरी उद्योग सालाना लगभग ₹17,800 करोड़ का व्यापार करता है, जिसमें से अकेले अमेरिका के साथ ₹3,000 से ₹3,500 करोड़ का कारोबार होता है। यह उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है।

डायमंड कारोबार 70% ठप, और पारंपरिक जड़ाऊ कला 90% तक खत्म

टैरिफ की मार दोहरी है। एक तरफ इसने आधुनिक डायमंड के व्यापार को प्रभावित किया है, तो दूसरी तरफ इसने राजस्थान की सदियों पुरानी विरासत कला को लगभग खत्म कर दिया है।

Traditional Kundan and Meenakari jewelry craftsmanship in Jaipur workshops

संकट सिर्फ बड़े निर्यातकों का नहीं, हजारों कारीगर बेरोजगार

यह संकट सिर्फ बड़ी निर्यातक कंपनियों तक सीमित नहीं है। इसकी आंच लाखों कारीगरों और छोटे व्यापारियों के घरों तक पहुंच गई है, जो इस उद्योग की रीढ़ हैं।

निष्कर्ष: एक महत्वपूर्ण मोड़

संक्षेप में, अमेरिकी टैरिफ ने राजस्थान के जेम एंड ज्वैलरी उद्योग को एक विनाशकारी मोड़ पर ला खड़ा किया है। ₹2500 करोड़ का भारी वित्तीय नुकसान, विरासत में मिली जड़ाऊ और कुंदन कला का लगभग खत्म हो जाना, और लाखों कारीगरों की बेरोजगारी इस संकट की गंभीर तस्वीर पेश करती है।

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