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SSC Exams: एसएससी_परीक्षा_संकट__एक_सिस्टम_की_विफलता_

SSC Exams: Disarray and the Future Crisis

एसएससी_परीक्षा_संकट__एक_सिस्टम_की_विफलता_

परीक्षा संचालन में वर्तमान तकनीकी गड़बड़ियों का छात्रों के भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

SSC की संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षा में तकनीकी गड़बड़ियाँ छात्रों के भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाल रही हैं।

छात्रों के भविष्य पर प्रभाव:

  • समय और पैसे की बर्बादी: परीक्षा रद्द या स्थगित होने से छात्रों का बहुमूल्य समय और आर्थिक संसाधन व्यर्थ हो जाते हैं। उदाहरण के लिए, दिल्ली की सिमरन को लंबी दूरी तय करने के बाद पता चलता है कि परीक्षा रद्द हो गई है।
  • अनिश्चितता और करियर का जोखिम: छात्रों को अगली परीक्षा की तारीख और स्थान का पता नहीं होता, जिससे उनकी तैयारी और करियर पर असर पड़ता है।
  • पूरा साल बर्बाद होने का डर: कई छात्रों को डर है कि उन्हें 'अनुपस्थित' दिखा दिया जाएगा, जिससे उनका पूरा साल खराब हो सकता है।
  • रैंक पर असर: SSC CGL जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं में एक अंक की गड़बड़ी हजारों छात्रों की रैंक को प्रभावित कर सकती है।
  • बार-बार की समस्याएँ: पेपर लीक, नकल, सिस्टम खराबी, सर्वर डाउन और परीक्षा रद्द जैसी समस्याएँ छात्रों का मनोबल गिरा रही हैं।

छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव:

  • मानसिक तनाव और परेशानी: तकनीकी गड़बड़ियों के कारण छात्रों में निराशा, खफा और नाराजगी बढ़ रही है।
  • शारीरिक और मानसिक थकावट: घंटों इंतजार और प्रवेश न मिलने से छात्रों को शारीरिक और मानसिक थकावट होती है।
  • हताशा और निराशा: बार-बार विरोध प्रदर्शन करने के बावजूद स्पष्ट जवाब न मिलने से हताशा बढ़ती है।
  • अविश्वास और चिंता: परीक्षा एजेंसियों और SSC के प्रति अविश्वास बढ़ रहा है, जिससे छात्रों की चिंता और तनाव बढ़ता है।

संक्षेप में, तकनीकी गड़बड़ियाँ छात्रों के भविष्य की संभावनाओं को गंभीर रूप से बाधित कर रही हैं और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भारी बोझ डाल रही हैं।

SSC परीक्षा प्रणाली में चल रही बदइंतजामी के मूल कारण और समाधान

मूल कारण:

  1. तकनीकी समस्याएँ:
    • सर्वर डाउन होना और पुरानी मशीनें/वायरिंग।
    • कमजोर तकनीक और सिस्टम खराबी।
  2. एजेंसी चयन में पारदर्शिता और प्रदर्शन:
    • सबसे कम बोली लगाने वाली एजेंसी (एडुक्विटी) का चयन, जबकि TCS की तकनीक बेहतर थी।
    • टेंडर बदलने में कठिनाई और शिकायतों पर अपर्याप्त कार्रवाई।
  3. प्रशासनिक बदइंतजामी और संचार की कमी:
    • एडमिट कार्ड देर से जारी होना।
    • अधूरी और अस्पष्ट जानकारी।
    • सीटों की कमी और अव्यवस्था।

समाधान:

  • दोषपूर्ण सेंटरों को बंद करना और छात्रों को वैकल्पिक केंद्रों पर शिफ्ट करना।
  • तकनीकी कमियों को दूर करना और मशीनरी का आधुनिकीकरण।
  • एडमिट कार्ड समय पर जारी करना।
  • टेंडर प्रक्रिया में तकनीकी क्षमता को अधिक प्राथमिकता देना।
  • एजेंसियों पर कड़ी निगरानी और आवश्यकतानुसार कानूनी कार्रवाई।
  • छात्रों को स्पष्ट, समय पर और पूर्ण जानकारी प्रदान करना।
  • मानसिक समर्थन और छात्रों की शिकायतों का त्वरित समाधान।

परीक्षा एजेंसी के चयन मानदंड और निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के कारण

  1. तकनीकी योग्यता की तुलना में लागत को अधिक महत्व देना:

    SSC की QCBS प्रक्रिया में तकनीकी मूल्यांकन को 70% और लागत को 30% वेटेज दिया जाता है, लेकिन कम लागत को तकनीकी श्रेष्ठता से ऊपर प्राथमिकता मिलने से पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।

  2. अनुबंध बदलने में कठिनाई और देरी का डर:

    एक बार टेंडर शुरू होने के बाद उसे बदलना मुश्किल होता है, जिससे खराब प्रदर्शन वाली एजेंसी को तुरंत हटाना संभव नहीं होता।

  3. खराब रिकॉर्ड वाली एजेंसी का चयन और शिकायतों पर कार्रवाई का अभाव:

    एडुक्विटी के खराब रिकॉर्ड के बावजूद उसे टेंडर मिला और शिकायतों के बावजूद तत्काल कार्रवाई नहीं हुई।

  4. प्रशासनिक कारणों का अस्पष्ट हवाला और संचार की कमी:

    परीक्षा रद्द करने के कारण अस्पष्ट बताए जाते हैं और छात्रों को समय पर सूचना नहीं मिलती।

संक्षेप में, तकनीकी श्रेष्ठता की तुलना में लागत को प्राथमिकता देना, अनुबंध में लचीलापन न होना, खराब प्रदर्शन पर कार्रवाई का अभाव, और अस्पष्ट संचार पारदर्शिता की कमी के मुख्य कारण हैं।

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