#

Breaking News

🎉 New Year Countdown 🎉

Loading...
📲 Share on WhatsApp

🎉 New Year Countdown 🎉

Loading...
📲 Share on WhatsApp
BREAKING NEWS Sky Institute ...........

ढ़ाई आखर प्रेम का'

'ढ़ाई आखर प्रेम का'

REVIEW OF PLAY

ढ़ाई आखर प्रेम का' के मंचन ने दर्शकों के दिलों को गहराई से छुआ और उन्हें एक विस्तृत भावनात्मक अनुभव प्रदान किया। दर्शकों की भावनाओं पर नाटक का प्रभाव और उनके दिल को जीतने के तरीके निम्नलिखित हैं:

  • 1. दर्शकों का दिल जीतने में सफलता
  • 2. भावनाओं की विस्तृत श्रृंखला (हंसी और आँसू
  • 3. निजी जीवन से जुड़ाव और आत्म-पहचान
  • 4. संवादों का विशेष प्रभाव
नाटक किस प्रसिद्ध मराठी नाटक पर आधारित था?

नाटक 'ढ़ाई आखर प्रेम का' प्रसिद्ध मराठी नाटककार वसंत कानेटकर द्वारा लिखित एक नाटक पर आधारित था।
जिस प्रसिद्ध मराठी नाटक पर यह आधारित था, उसका नाम है:
• प्रेमा, तुझा रंग कसा? (Prema, Tuzha Rang Kasa?)
नाटक 'ढ़ाई आखर प्रेम का' इसी मराठी नाटक का हिंदी रूपांतरण है।
'कलंदर संस्था' कहाँ स्थित है?
कलंदर संस्था जयपुर में स्थित है।
इस संस्था की ओर से राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में नाटक 'ढ़ाई आखर प्रेम का' का मंचन किया गया था।

Discuss नाटक का मंचन.
  • 1. मंचन का स्थान और आयोजक संस्था
  • 2. नाटक का आधार और निर्देशन
  • 3. विषय वस्तु और प्रस्तुति का उद्देश्
  • अभिनय और पात्र
  • 5. दर्शकों पर प्रभाव और प्रतिक्रिया

नाटक 'ढ़ाई आखर प्रेम का' का मंचन एक अत्यंत सफल और भावनात्मक कार्यक्रम था, जिसने दर्शकों को हँसी और विचार दोनों से सराबोर कर दिया।

यहां मंचन से संबंधित मुख्य बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा दी गई है:
• नाटक 'ढ़ाई आखर प्रेम का' का मंचन राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC) में हुआ था। • इस मंचन का आयोजन कलंदर संस्था, जयपुर की ओर से किया गया था।
• यह नाटक प्रसिद्ध मराठी नाटककार वसंत कानेटकर द्वारा लिखित मराठी नाटक 'प्रेमा, तुझा रंग कसा?' का हिंदी रूपांतरण था।
• इसका निर्देशन रुचि भार्गव नरूला ने किया था।
• मंचन का मुख्य उद्देश्य विवाह की विसंगतियों पर प्रहार करना था।
• नाटक ने प्रेम और विवाह की गहराई को छुआ।
• इस प्रस्तुति में यह दिखाया गया कि प्रेम की उदात्त भावना जब विवाह के व्यवहारिक स्वरूप में ढलती है, तो कई विसंगतियां जन्म लेती हैं।
• नाटक ने न केवल प्रेम की जटिलताओं को उजागर किया, बल्कि दर्शकों को विवाह की सच्चाइयों पर भी विचार करने को प्रेरित किया।
• कलंदर संस्था ने इस मंचन के माध्यम से यह संदेश दिया कि प्रेम जीवन की सबसे सशक्त अनुभूति है।यह नाटक दर्शकों के बीच अत्यंत सफल रहा,

• नाटक के संवादों ने जीता दर्शकों का दिल। मंचन में शामिल सभी पात्रों ने अपने अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया। रुचि भार्गव नरूला ने निर्देशन के साथ-साथ प्रियंवदा का किरदार भी निभाया।
प्रमुख पात्रों और कलाकारों के नाम निम्नलिखित हैं:

  • • प्रियंवदा: रुचि भार्गव नरूला
  • • प्रो. वर्मा: कार्तिकेय मिश्रा
  • • बाजा बाबू: मनन शर्मा
  • • बच्चू: अनिमेष आचार्य
    • बबली: रिया शर्मा
    • सुशील: प्रतीक्षा सक्सेना
    • पंडितजी: सर्वेश व्यास

• सभी पात्रों—जैसे प्रियंवदा, प्रो. वर्मा, बाजा बाबू, बच्चू, बबली, सुशील और पंडितजी—ने अपने-अपने अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया। दर्शकों ने मंचन के दौरान भावनाओं की एक विस्तृत श्रृंखला का अनुभव किया, जिससे पूरा सभागार प्रभावित हुआ:
• पूरा सभागार हंसी और भावनाओं से सराबोर हो उठा।
• नाटक के दौरान कभी हंसी के ठहाके गूंजे तो कभी संवादों ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं।
नाटक की सफलता का एक प्रमुख कारण यह था कि दर्शकों ने मंचित विसंगतियों में अपने जीवन की झलक देखी:
• दर्शकों ने नाटक के संवादों और घटनाओं में अपने जीवन की झलक महसूस की। • इस जुड़ाव ने दर्शकों को न केवल हंसाया, बल्कि उन्हें विवाह की सच्चाइयों पर भी विचार करने को प्रेरित किया।
कुछ विशेष संवादों ने दर्शकों पर इतना गहरा प्रभाव डाला कि उन्होंने जोरदार प्रतिक्रिया व्यक्त की:
• पात्रों (प्रोफेसर, पंडितजी, प्रेमी-प्रेमिका और परिवारजनों) ने अपने संवादों और अभिनय से दर्शकों को खूब हंसाया।
• पंडितजी के संवाद "प्रेम शब्दों में नहीं बोलता, वह तो दो मजबूत बाहों से बोलता है" ने प्रभाव डाला।
• प्रोफेसर वर्मा की पंक्तियां "अगर रोमियो-जूलियट ने शादी कर ली होती तो उन्हें भी प्रेम की सच्चाई समझ आ जाती" पर सभागार तालियों से गूंज उठा। यह विशेष प्रतिक्रिया दर्शाती है कि दर्शकों ने विवाह के व्यावहारिक पहलुओं से कितनी मजबूती से सहमति व्यक्त की।
इस प्रकार, 'ढ़ाई आखर प्रेम का' नाटक ने न केवल दर्शकों का मनोरंजन किया, बल्कि उन्हें प्रेम और विवाह की जटिलताओं पर विचार करने के लिए मजबूर करके उनके दिल और दिमाग दोनों पर गहरा असर डाला।

मंचन का दर्शकों पर गहरा भावनात्मक और मनोरंजक प्रभाव पड़ा:• पूरा सभागार हंसी और भावनाओं से सराबोर हो उठा।
• संवादों और अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया गया।• नाटक के दौरान कभी हंसी के ठहाके गूंजे तो कभी संवादों ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं।
• दर्शकों ने नाटक के संवादों और घटनाओं में अपने जीवन की झलक महसूस की।•
कुछ संवादों पर दर्शकों की विशेष प्रतिक्रिया आई, जैसे पंडितजी के संवाद "प्रेम शब्दों में नहीं बोलता, वह तो दो मजबूत बाहों से बोलता है"
और प्रोफेसर वर्मा की पंक्तियाँ "अगर रोमियो-जूलियट ने शादी कर ली होती तो उन्हें भी प्रेम की सच्चाई समझ आ जाती" जिस पर सभागार तालियों से गूंज उठा।

कोई टिप्पणी नहीं