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राजस्थान का अगला मुख्य सचिव:

राजस्थान का अगला मुख्य सचिव: दावेदार और प्रक्रिया प्रस्तुत समाचार स्रोत राजस्थान के अगले मुख्य सचिव की संभावित दौड़ पर केंद्रित है, क्योंकि वर्तमान मुख्य सचिव सुधांश पंत केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जा रहे हैं। इसमें पांच वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों—अभय कुमार, तन्मय कुमार, अखिल अरोड़ा, आनंद कुमार, और वी. श्रीनिवास—को प्रमुख दावेदार बताया गया है। प्रत्येक दावेदार के मजबूत पक्ष और उनकी पृष्ठभूमि की विस्तृत जानकारी दी गई है, साथ ही यह भी समझाया गया है कि उन्हें क्यों मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है। इसके अतिरिक्त, इस लेख में मुख्य सचिव की नियुक्ति की प्रक्रिया और राजनीतिक तथा सामाजिक समीकरणों के प्रभाव पर भी चर्चा की गई है, जिसमें बताया गया है कि सरकारें अक्सर वरिष्ठता को दरकिनार कर अपनी पसंद के अधिकारी को चुनती हैं। विशेषज्ञ टिप्पणियों के माध्यम से यह निष्कर्ष निकाला गया है कि अब ऐसी नियुक्तियों में राजनीतिक लाभ-हानि भी देखी जाती है। मुख्य सचिव दौड़. राजस्थान में मुख्य सचिव की दौड़ (मुख्य सचिव दौड़) सुधांश पंत के दिल्ली में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के बाद शुरू हुई है, और यह सस्पेंस 30 नवंबर को पंत के रिलीव होने के साथ ही खत्म हो सकता है। भास्कर के विश्लेषण के अनुसार, प्रदेश में पाँच (5) IAS अधिकारी प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। मुख्य सचिव पद के प्रमुख दावेदार मुख्य सचिव की रेस में वरिष्ठता (Seniority) के हिसाब से जिन 5 IAS अधिकारियों के नाम सबसे आगे हैं, वे निम्नलिखित हैं: 1. अभय कुमार • बैच और वर्तमान पद: ये 1992 बैच के वरिष्ठ आईएएस हैं और वर्तमान में जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) हैं। • छवि और कार्यशैली: इन्हें लाइमलाइट से दूर रहने वाला, पर्दे के पीछे काम करने में माहिर और बेबाक अफसर माना जाता है। • दावेदारी के मुख्य कारण: ◦ इनका रिकॉर्ड केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का तेजी से क्रियान्वयन करने का रहा है। ◦ वर्तमान में, ये जल संसाधन विभाग के तहत ERCP की राम जल सेतु लिंक परियोजना को आगे बढ़ा रहे हैं। ◦ सरकारें इन्हें परफॉर्मेंस के रूप में देखती रही हैं। 2. तन्मय कुमार • बैच और वर्तमान पद: ये 1993 बैच के आईएएस हैं। वह पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रिंसिपल सेक्रेटरी रह चुके हैं। वर्तमान में वह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में सचिव के पद पर कार्यरत हैं। • छवि और कार्यशैली: इनकी छवि सख्त रवैये वाले अफसर की है। • दावेदारी के मुख्य कारण: ◦ इनके केंद्र से अच्छे संपर्क हैं। ◦ ये केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की टीम के भरोसेमंद अफसर माने जाते हैं। ◦ शाह का कामकाज देख रहे एक आईएएस से इनके अच्छे संबंध हैं। ◦ गौरव पथ योजना, भामाशाह योजना, निवेश नीति की स्थापना जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के पीछे इनकी भूमिका रही है।
3. अखिल अरोड़ा • बैच और वर्तमान पद: ये 1993 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। ये जलदाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव हैं। • पृष्ठभूमि: ये गहलोत और वसुंधरा राजे, दोनों सरकारों में अहम पदों पर रहे हैं। इन्होंने पिछली सरकार और वर्तमान भजनलाल सरकार में लंबे समय तक वित्त विभाग की कमान संभाली। • दावेदारी के मुख्य कारण: ◦ ये वित्त प्रबंधन के अच्छे जानकार माने जाते हैं। ◦ इन्होंने प्रदेश में स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए कई प्रयोग किए हैं। ◦ भामाशाह टेक्नो हब प्रोजेक्ट इन्हीं की देन है। ◦ ये नवाचार पसंद करते हैं और वर्तमान में जल जीवन मिशन के तहत घर-घर पानी पहुंचाने के लिए काम कर रहे हैं। 4. आनंद कुमार • बैच और वर्तमान पद: ये 1994 बैच के आईएएस हैं और वर्तमान में वन एवं पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव हैं। • पृष्ठभूमि: जब भी कोई नई नियुक्ति (जैसे राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त या आरपीएससी के चेयरमैन) होनी होती है, इनका नाम चर्चा में आता रहा है। • दावेदारी के मुख्य कारण: ◦ ये शालीन और मिलनसार अफसर माने जाते हैं। ◦ दलित समाज से आने के कारण ये सियासी समीकरणों में फिट बैठते हैं। ◦ भजनलाल सरकार सियासी मैसेज देने के लिए इन पर दांव खेल सकती है। 5. वी. श्रीनिवास • बैच और वरिष्ठता: ये 1989 बैच के सबसे वरिष्ठ आईएएस अफसर हैं। (सुबोध अग्रवाल के 31 दिसंबर और शुभ्रा सिंह के 31 जनवरी 2025 को सेवानिवृत्त होने के बाद ये सबसे वरिष्ठ बचेंगे)। • वर्तमान पद और सेवानिवृत्ति: ये लंबे समय से दिल्ली में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं और प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग में सचिव पर तैनात हैं। इनका सेवानिवृत्ति अगस्त 2026 में होना है। • छवि और कार्यशैली: इनकी गिनती उन अफसरों में होती है जो दबाव में काम करना पसंद नहीं करते। • दावेदारी के मुख्य कारण: ◦ ये प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के पसंद के अधिकारी माने जाते हैं। ◦ इनके पास नई दिल्ली में लंबे समय से कार्य करने का अनुभव है। ◦ ये ब्यूरोक्रेसी में नवाचार करने में एक्सपर्ट माने जाते हैं। ◦ सरकार इन्हें एक्सटेंशन देकर मुख्य सचिव बना सकती है। मुख्य सचिव की नियुक्ति की प्रक्रिया और राजनीतिक आयाम मुख्य सचिव की नियुक्ति का अंतिम फैसला सरकार की पसंद से ही होता है। हालांकि, इसके लिए एक प्रक्रिया अपनाई जाती है: 1. पैनल भेजना: राज्य सरकार 3 वरिष्ठतम अधिकारियों का पैनल बनाकर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भेजती है। 2. अंतिम चयन: केंद्र के डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ट्रेनिंग (डीओपीटी) और गृह मंत्रालय की सलाह के बाद अंतिम चयन होता है। 3. मानदंड: चयन प्रक्रिया में IAS अफसर का सेवा रिकॉर्ड और अनुभव समेत अन्य मानदंडों को देखा जाता है। राजनीतिक पहलू और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश: • राजनीतिक लाभ-हानि: वरिष्ठ पत्रकार नारायण बारेठ के अनुसार, सरकारें अब मुख्य सचिव जैसे शीर्ष पदों पर नियुक्ति को सोशल इंजीनियरिंग और पॉलिटिकल लाभ-हानि के हिसाब से देखने लगी हैं। • सुपरसीड करना: मेरिट में टॉप पर रहने वाले अफसरों को भी सुपरसीड (लांघ) कर किसी ऐसे अधिकारी को बनाया जाता है जो सरकार की जातिगत, क्षेत्रवाद और राजनीति संबंधी सोच व संदेश को मजबूत करता हो। उदाहरण के लिए, पिछली गहलोत सरकार में 10 आईएएस अफसरों की वरिष्ठता लांघते हुए निरंजन आर्य को मुख्य सचिव बनाया गया था। इसी तरह, भजनलाल सरकार में भी सुधांश पंत को मुख्य सचिव बनाने के लिए वरिष्ठता का उल्लंघन किया गया था। • मुख्यमंत्री की भूमिका: राजस्थान में, मुख्य सचिव की नियुक्ति मुख्यमंत्री की सिफारिश पर होती रही है, चाहे केंद्र में किसी भी दल की सरकार क्यों न रही हो। • न्यायिक दिशानिर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने 8 दिसंबर 2023 को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था कि भले ही मुख्य सचिव की नियुक्ति केंद्र सरकार करती है, लेकिन कुछ विषयों पर निर्वाचित राज्य सरकार के निर्देशों का पालन करना होगा। सुधांश पंत 30 नवंबर को रिलीव होंगे, और संभावना है कि उसी दिन नए सीएस के आदेश जारी हो सकते हैं। Discuss नियुक्ति प्रक्रिया. मुख्य सचिव की नियुक्ति की प्रक्रिया में औपचारिक मानदंड और राजनीतिक पसंद दोनों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। मुख्य सचिव की नियुक्ति की प्रक्रिया निम्नलिखित है: औपचारिक प्रक्रिया • पैनल निर्माण: राज्य सरकार 3 वरिष्ठतम अधिकारियों का पैनल बनाकर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भेजती है। • अंतिम चयन: केंद्र में, डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ट्रेनिंग (डीओपीटी) और गृह मंत्रालय की सलाह के बाद अंतिम चयन होता है। • मानदंड: चयन प्रक्रिया में आईएएस अफसर का सेवा रिकॉर्ड, अनुभव और अन्य मानदंडों को देखा जाता है। सरकारी पसंद और कानूनी निर्देश हालांकि चयन प्रक्रिया में केंद्र सरकार की भूमिका होती है, लेकिन मुख्य सचिव किसे बनाया जाए, इसका फैसला सरकार की पसंद से ही होता है। • मुख्यमंत्री की सिफारिश: राजस्थान में मुख्य सचिव की नियुक्ति मुख्यमंत्री की सिफारिश पर होती रही है, चाहे केंद्र में किसी भी दल की सरकार क्यों न रही हो। • सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश: नियुक्ति करते समय सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का भी पालन करना आवश्यक होता है। • निर्वाचित सरकार का महत्व: 8 दिसंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया था कि भले ही मुख्य सचिव की नियुक्ति केंद्र सरकार करती हो, लेकिन कुछ विषयों पर निर्वाचित सरकार के निर्देशों का भी पालन करना होगा। राजनीतिक पहलू और वरिष्ठता का उल्लंघन वरिष्ठ पत्रकार नारायण बारेठ का कहना है कि अब सरकारें मुख्य सचिव जैसे शीर्ष पदों पर नियुक्ति को सोशल इंजीनियरिंग और पॉलिटिकल लाभ-हानि के हिसाब से भी देखती हैं। • सीनियरिटी को लांघना: कई बार मेरिट में टॉप पर रहने वाले अफसरों को सुपरसीड (लांघ) कर किसी ऐसे अधिकारी को मुख्य सचिव बना दिया जाता है, जो सरकार की जातिगत, क्षेत्रवाद और राजनीति संबंधी सोच व संदेश को मजबूत करता हो। • उदाहरण: ◦ पिछली गहलोत सरकार में 10 आईएएस अफसरों की वरिष्ठता लांघते हुए निरंजन आर्य को मुख्य सचिव बनाया गया था, क्योंकि वह अशोक गहलोत की पसंद के अफसर थे। तब केंद्र की मोदी सरकार ने भी गहलोत की पसंद पर मुहर लगाई थी। ◦ इसी प्रकार, भजनलाल सरकार में सुधांश पंत को मुख्य सचिव बनाने के लिए भी वरिष्ठता का उल्लंघन किया गया था। Discuss आईएएस अधिकारी दावेदार. राजस्थान की नौकरशाही में अगले मुख्य सचिव (Chief Secretary) के पद के लिए प्रमुख आईएएस अधिकारी दावेदारों की दौड़ के संबंध में जानकारी स्रोतों में दी गई है। यह चर्चा मुख्य सचिव सुधांश पंत के दिल्ली में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के बाद शुरू हुई है। भास्कर के विश्लेषण के अनुसार, प्रदेश में पाँच आईएएस अधिकारी प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। ये दावेदार हैं: अभय कुमार, तन्मय कुमार, अखिल अरोड़ा, आनंद कुमार और वी. श्रीनिवास। मुख्य सचिव पद के प्रमुख आईएएस दावेदार यहाँ पाँच प्रमुख दावेदारों, उनकी वरिष्ठता और उनकी मजबूत दावेदारी के कारणों का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. अभय कुमार • बैच और पद: ये 1992 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं। वर्तमान में वे जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव हैं। • छवि और कार्य: अभय कुमार लाइमलाइट से दूर रहकर पर्दे के पीछे काम करने में माहिर माने जाते हैं। उनकी छवि बेबाक अफसर की है, और वे कभी काम का श्रेय भी नहीं लेते हैं। • मजबूत दावेदारी: केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का तेजी से क्रियान्वयन करने का इनका रिकॉर्ड रहा है। सरकारें इन्हें परफॉर्मेंस के रूप में देखती रही हैं। वर्तमान में वे जल संसाधन विभाग में ERCP के तहत राम जल सेतु लिंक परियोजना को आगे बढ़ा रहे हैं। 2. तन्मय कुमार • बैच और पद: ये 1993 बैच के आईएएस हैं। वे पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रिंसिपल सेक्रेटरी भी रह चुके हैं। वर्तमान में वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में सचिव के पद पर कार्यरत हैं। • छवि और संपर्क: उनकी छवि सख्त रवैये वाले अफसर की है। केंद्र से उनके अच्छे संपर्क माने जाते हैं। • मजबूत दावेदारी: उन्हें केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की टीम के भरोसेमंद अफसर माना जाता है। शाह का कामकाज देख रहे एक आईएएस से भी उनके अच्छे संबंध हैं। गौरव पथ योजना, भामाशाह योजना और निवेश नीति की स्थापना में तन्मय कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। 3. अखिल अरोड़ा • बैच और पद: ये भी 1993 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वे वर्तमान में जलदाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव हैं। • कार्य अनुभव: अखिल अरोड़ा गहलोत और वसुंधरा राजे दोनों सरकारों में अहम पदों पर रहे हैं। उन्होंने पिछली सरकार में वित्त विभाग में काम किया और भजनलाल सरकार में भी लंबे समय तक वित्त विभाग की कमान संभाली। • मजबूत दावेदारी: उन्हें वित्त प्रबंधन का अच्छा जानकार माना जाता है और वे नवाचार पसंद करते हैं। उन्होंने प्रदेश में स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए कई प्रयोग किए हैं, और भामाशाह टेक्नो हब प्रोजेक्ट उन्हीं की देन है। 4. आनंद कुमार • बैच और पद: ये 1994 बैच के आईएएस हैं। वर्तमान में वे वन एवं पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव हैं। • चर्चा में नाम: जब भी कोई नई नियुक्ति होनी होती है (जैसे राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त या आरपीएससी के चेयरमैन की नियुक्ति), तो आनंद कुमार का नाम चर्चा में आता रहा है। हालांकि, चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी रहते हुए डॉक्टर्स की हड़ताल के समय असमंजस की स्थिति भी दिखी थी। • छवि और समीकरण: वे शालीन और मिलनसार अफसर माने जाते हैं। • मजबूत दावेदारी: दलित समाज से आने के कारण वे सियासी समीकरणों में फिट बैठते हैं। भजनलाल सरकार सियासी संदेश देने के लिए आनंद कुमार पर दांव खेल सकती है। 5. वी. श्रीनिवास (V. Srinivas) • बैच और वरिष्ठता: ये 1989 बैच के आईएएस अफसर हैं। 31 दिसंबर को सुबोध अग्रवाल और 31 जनवरी 2025 को शुभ्रा सिंह की सेवानिवृत्ति के बाद, वी. श्रीनिवास ही सबसे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बचते हैं। • पद और रिटायरमेंट: वे लंबे समय से दिल्ली में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं और फिलहाल प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग में सचिव पर तैनात हैं। उनका रिटायरमेंट अगस्त 2026 में होना है। • छवि: उनकी गिनती उन अफसरों में होती है जो दबाव में काम करना पसंद नहीं करते। • मजबूत दावेदारी: वे प्रधानमंत्री कार्यालय के पसंद के अधिकारी माने जाते हैं। उनके पास नई दिल्ली में लंबे समय से कार्य करने का अनुभव है। उन्हें ब्यूरोक्रेसी में नवाचार करने में एक्सपर्ट माना जाता है। सरकार उन्हें एक्सटेंशन देकर मुख्य सचिव बना सकती है। मुख्य सचिव की नियुक्ति प्रक्रिया और राजनीतिक पहलू मुख्य सचिव की नियुक्ति का अंतिम फैसला सरकार की पसंद से ही होता है, हालांकि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करना आवश्यक है। • प्रक्रिया: राज्य सरकार 3 वरिष्ठतम अधिकारियों का पैनल बनाकर यूपीएससी को भेजती है। इसके बाद केंद्र के डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ट्रेनिंग (डीओपीटी) और गृह मंत्रालय की सलाह के बाद अंतिम चयन होता है। चयन प्रक्रिया में आईएएस अफसर का सेवा रिकॉर्ड और अनुभव जैसे अन्य मानदंडों को देखा जाता है। • राजनीतिक दखल: वरिष्ठ पत्रकार नारायण बारेठ का कहना है कि सरकारें मुख्य सचिव के पद को सोशल इंजीनियरिंग और पॉलिटिकल लाभ-हानि के हिसाब से देखने लगी हैं। राजस्थान में मुख्यमंत्री की सिफारिश पर मुख्य सचिव की नियुक्ति होती रही है। • वरिष्ठता का उल्लंघन: कई बार मेरिट में टॉप पर रहने वाले अफसरों को सुपरसीड (लांघ) कर दिया जाता है, क्योंकि चयनित अफसर सरकार की जातिगत, क्षेत्रवाद और राजनीति संबंधी सोच को मजबूत करता है। उदाहरण के लिए, कांग्रेस सरकार में 10 आईएएस अफसरों की वरिष्ठता लांघते हुए निरंजन आर्य को मुख्य सचिव बनाया गया था, और भजनलाल सरकार में भी सुधांश पंत को सीएस बनाने के लिए वरिष्ठता का उल्लंघन किया गया था। यह पूरी प्रक्रिया इस बात का संकेत देती है कि मुख्य सचिव की नियुक्ति केवल वरिष्ठता पर आधारित नहीं होती, बल्कि अधिकारी की परफॉर्मेंस, राजनीतिक संपर्क और सरकार के सियासी समीकरणों में फिट बैठने की क्षमता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। Discuss राजनीतिक लाभ हानि. मुख्य सचिव जैसे शीर्ष प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति में अब राजनीतिक लाभ-हानि (पॉलिटिकल लाभ-हानि) एक महत्वपूर्ण कारक बन गया है, जो केवल मेरिट (योग्यता) और वरिष्ठता से परे जाकर सरकार के व्यापक राजनीतिक और सामाजिक लक्ष्यों को दर्शाता है। वरिष्ठ पत्रकार नारायण बारेठ के अनुसार, ब्यूरोक्रेसी से जुड़े शीर्ष पदों पर नियुक्ति के मायने बदल गए हैं, और सरकारें मुख्य सचिव की पोस्ट को सोशल इंजीनियरिंग और पॉलिटिकल लाभ-हानि के हिसाब से देखने लगी हैं। राजनीतिक लाभ-हानि के मुख्य आयाम: 1. सामाजिक और राजनीतिक संदेश (Social and Political Messaging) सरकारें अक्सर मेरिट में सबसे ऊपर रहने वाले अफसरों को सुपरसीड (लांघ) करके किसी ऐसे अधिकारी को चुनती हैं, जो सरकार की जातिगत, क्षेत्रवाद और राजनीति संबंधी सोच व संदेश को मजबूत करता हो। • उदाहरण के लिए: आईएएस अधिकारी आनंद कुमार की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है क्योंकि वे दलित समाज से आते हैं, जिसके कारण वे सियासी समीकरणों में फिट बैठते हैं। भजनलाल सरकार सियासी मैसेज देने के लिए आनंद कुमार पर दांव खेल सकती है। 2. वरिष्ठता का उल्लंघन (Bypassing Seniority) मुख्य सचिव की नियुक्ति में राजनीतिक पसंद के चलते वरिष्ठता का उल्लंघन आम हो गया है: • पिछली सरकारें: पिछली गहलोत सरकार में 10 आईएएस अफसरों की वरिष्ठता लांघते हुए निरंजन आर्य को मुख्य सचिव बनाया गया था। आर्य अशोक गहलोत की पसंद के अफसर थे। • वर्तमान सरकार: इसी तरह, भजनलाल सरकार में भी सुधांश पंत को मुख्य सचिव बनाने के लिए वरिष्ठता का उल्लंघन किया गया था। 3. मुख्यमंत्री की पसंद (Chief Minister's Preference) मुख्य सचिव किसे बनाया जाए, इसका अंतिम फैसला सरकार की पसंद से ही होता है। राजस्थान में मुख्य सचिव की नियुक्ति हमेशा मुख्यमंत्री की सिफारिश पर होती रही है। यह प्रवृत्ति तब भी देखी गई है जब केंद्र और राज्य में अलग-अलग दलों की सरकारें रही हैं; उदाहरण के लिए, वसुंधरा राजे सरकार के समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, फिर भी मुख्य सचिव राजे की पसंद का बना था। 4. न्यायिक दिशा-निर्देशों का संदर्भ हालांकि नियुक्ति केंद्र सरकार करती है, सुप्रीम कोर्ट ने 8 दिसंबर 2023 को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था कि मुख्य सचिव की नियुक्ति के संबंध में कुछ विषयों पर निर्वाचित राज्य सरकार के निर्देशों का पालन करना होगा। संक्षेप में, मुख्य सचिव की दौड़ केवल प्रशासनिक दक्षता या वरिष्ठता पर आधारित नहीं है, बल्कि यह सरकार के राजनीतिक और सामाजिक संदेशों को साधने और मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत पसंद के आस-पास घूमती है। Discuss राजस्थान ब्यूरोक्रेसी. राजस्थान की नौकरशाही (Bureaucracy) के बारे में उपलब्ध जानकारी मुख्य रूप से शीर्ष पद, यानी मुख्य सचिव (Chief Secretary) की नियुक्ति और इस पद के इर्द-गिर्द की राजनीति पर केंद्रित है। यहां राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी और उसके संचालन से संबंधित प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा की गई है: 1. ब्यूरोक्रेसी का वर्तमान नेतृत्व और संक्रमण राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी का अगला मुखिया (बॉस) कौन होगा, यह सवाल वर्तमान में सबसे बड़ा मुद्दा है। यह स्थिति मुख्य सचिव सुधांश पंत के अचानक दिल्ली में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले जाने (हटाए जाने/वापसी) के बाद उत्पन्न हुई है। यह सस्पेंस 30 नवंबर को पंत के रिलीव होने के साथ ही खत्म होने की संभावना है, जब नए सीएस के आदेश जारी हो सकते हैं। 2. शीर्ष स्तरीय दावेदार (The Top Layer) मुख्य सचिव की दौड़ में वरिष्ठता (सीनियरिटी) के लिहाज से पाँच वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं, जो ब्यूरोक्रेसी के शीर्ष पद के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं: दावेदार (बैच) वर्तमान पद/स्थिति मुख्य विशेषताएँ वी. श्रीनिवास (1989) केंद्रीय प्रतिनियुक्ति, प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग में सचिव सबसे वरिष्ठ आईएएस (दिसंबर/जनवरी के बाद)। पीएमओ के पसंद के अधिकारी और ब्यूरोक्रेसी में नवाचार करने में एक्सपर्ट माने जाते हैं। अभय कुमार (1992) जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव लाइमलाइट से दूर, बेबाक अफसर। सरकारें इन्हें परफॉर्मेंस के रूप में देखती रही हैं। योजनाओं के तेजी से क्रियान्वयन का रिकॉर्ड है। तन्मय कुमार (1993) केंद्रीय प्रतिनियुक्ति, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में सचिव केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की टीम के भरोसेमंद अफसर। सख्त रवैये वाले और केंद्र से अच्छे संपर्क वाले अधिकारी। अखिल अरोड़ा (1993) जलदाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त प्रबंधन के अच्छे जानकार। गहलोत और भजनलाल दोनों सरकारों में वित्त विभाग की कमान संभाली। भामाशाह टेक्नो हब प्रोजेक्ट इन्हीं की देन है। आनंद कुमार (1994) वन एवं पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शालीन और मिलनसार। दलित समाज से आने के कारण सियासी समीकरणों में फिट बैठते हैं, और भजनलाल सरकार सियासी मैसेज देने के लिए इन पर दांव खेल सकती है। 3. नियुक्ति प्रक्रिया में राजनीतिक प्रभाव राजस्थान ब्यूरोक्रेसी में शीर्ष पदों पर नियुक्ति का फैसला केवल सेवा रिकॉर्ड या अनुभव के आधार पर नहीं होता, बल्कि यह सरकार की पसंद पर निर्भर करता है। यह दिखाता है कि ब्यूरोक्रेसी में राजनीतिक हस्तक्षेप काफी गहरा है: • मुख्यमंत्री का महत्व: राजस्थान में मुख्य सचिव की नियुक्ति हमेशा मुख्यमंत्री की सिफारिश पर होती रही है, भले ही केंद्र में किसी भी दल की सरकार रही हो। • सोशल इंजीनियरिंग: वरिष्ठ पत्रकार नारायण बारेठ के अनुसार, सरकारें अब मुख्य सचिव की पोस्ट को सोशल इंजीनियरिंग और पॉलिटिकल लाभ-हानि के हिसाब से देखती हैं। • वरिष्ठता का उल्लंघन (Superceding): अक्सर मेरिट में टॉप पर रहने वाले अफसरों को सुपरसीड (लांघ) कर ऐसे अधिकारी को नियुक्त किया जाता है जो सरकार की जातिगत, क्षेत्रवाद और राजनीति संबंधी सोच व संदेश को मजबूत करता हो। ◦ उदाहरण के लिए, पिछली गहलोत सरकार में 10 आईएएस अफसरों की वरिष्ठता लांघकर निरंजन आर्य को सीएस बनाया गया था। भजनलाल सरकार में भी सुधांश पंत को मुख्य सचिव बनाने के लिए वरिष्ठता का उल्लंघन किया गया था। • न्यायिक हस्तक्षेप: हालांकि नियुक्ति केंद्र सरकार (डीओपीटी और गृह मंत्रालय की सलाह पर) करती है, सुप्रीम कोर्ट ने 8 दिसंबर 2023 को फैसला दिया था कि निर्वाचित राज्य सरकार के निर्देशों का पालन कुछ विषयों पर करना होगा। यह दिखाता है कि राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी का शीर्ष नेतृत्व एक ऐसा केंद्र है जहाँ प्रशासनिक योग्यता, राजनीतिक निष्ठा और जातिगत/क्षेत्रीय समीकरणों का मेल होता है। सुधांश पंत कब रिलीव होंगे? स्रोत के अनुसार, मुख्य सचिव सुधांश पंत 30 नवंबर को रिलीव होंगे। यह सस्पेंस कि राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी का अगला मुखिया कौन होगा, 30 नवंबर को पंत के रिलीव होने के साथ ही खत्म हो सकता है। ऐसी संभावना है कि उसी दिन नए मुख्य सचिव (CS) के आदेश जारी हो सकते हैं। उल्लेखनीय है कि सुधांश पंत को अचानक दिल्ली में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर बुलाए जाने के आदेश से सभी को आश्चर्य हुआ था। सुधांश पंत कब रिलीव होंगे? सुधांश पंत 30 नवंबर को रिलीव होंगे। यह संभावना है कि पंत के रिलीव होने के साथ ही उसी दिन (30 नवंबर को) नए मुख्य सचिव (सीएस) के आदेश जारी हो सकते हैं। कितने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दावेदार हैं? राजस्थान में मुख्य सचिव (Chief Secretary) की दौड़ में कुल 5 आईएएस अधिकारी प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। भास्कर के विश्लेषण के अनुसार, ये 5 सीनियर आईएएस अधिकारी मुख्य सचिव की दौड़ में सबसे आगे हैं। ये प्रमुख दावेदार निम्नलिखित हैं: 1. अभय कुमार (Abhay Kumar) 2. तन्मय कुमार (Tanmay Kumar) 3. अखिल अरोड़ा (Akhil Arora) 4. आनंद कुमार (Anand Kumar) 5. वी. श्रीनिवास (V. Srinivas) इन पांच अफसरों में से ही किसी एक को मुख्य सचिव सुधांश पंत के 30 नवंबर को रिलीव होने के बाद राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी का अगला मुखिया बनाए जाने की संभावना है। मुख्य सचिव नियुक्ति प्रक्रिया क्या है? मुख्य सचिव की नियुक्ति प्रक्रिया में औपचारिक चयन मानदंडों के साथ-साथ सरकार की राजनीतिक पसंद का भी महत्वपूर्ण प्रभाव रहता है। यहां मुख्य सचिव की नियुक्ति की प्रक्रिया के विभिन्न चरण और आयाम दिए गए हैं, जैसा कि स्रोतों में उल्लेख किया गया है: 1. औपचारिक चयन प्रक्रिया मुख्य सचिव की नियुक्ति केंद्र और राज्य सरकार दोनों की भागीदारी से होती है, जिसमें निम्नलिखित चरण शामिल हैं: 1. पैनल भेजना: राज्य सरकार 3 वरिष्ठतम अधिकारियों का पैनल बनाकर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भेजती है। 2. अंतिम चयन: केंद्र में, डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ट्रेनिंग (डीओपीटी) और गृह मंत्रालय की सलाह के बाद अंतिम चयन होता है। 3. मानदंड: चयन प्रक्रिया में आईएएस अफसर का सेवा रिकॉर्ड और अनुभव समेत अन्य मानदंडों को देखा जाता है। 2. राजनीतिक और मुख्य कार्यकारी की भूमिका मुख्य सचिव किसे बनाया जाए, इस पर अंतिम फैसला सरकार की पसंद से ही होता है। • मुख्यमंत्री की सिफारिश: राजस्थान में मुख्य सचिव की नियुक्ति हमेशा मुख्यमंत्री की सिफारिश पर होती रही है। यह परंपरा तब भी कायम रही जब केंद्र और राज्य में अलग-अलग दलों की सरकारें थीं; उदाहरण के लिए, वसुंधरा राजे सरकार के समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, फिर भी मुख्य सचिव राजे की पसंद का बना था। • वरिष्ठता का उल्लंघन (सुपरसीड): ब्यूरोक्रेसी से जुड़े शीर्ष पदों पर नियुक्ति में अब पॉलिटिकल लाभ-हानि भी देखी जाती है। मेरिट में टॉप पर रहने वाले अफसरों को भी सुपरसीड (लांघ) कर किसी ऐसे अधिकारी को बनाया जाता है, जो सरकार की जातिगत, क्षेत्रवाद और राजनीति संबंधी सोच व संदेश को मजबूत करता हो। ◦ उदाहरण: पिछली गहलोत सरकार में 10 आईएएस अफसरों की वरिष्ठता लांघते हुए निरंजन आर्य को मुख्य सचिव बनाया गया था, क्योंकि वे अशोक गहलोत की पसंद के अफसर थे। इसी तरह, भजनलाल सरकार में भी सुधांश पंत को मुख्य सचिव बनाने के लिए वरिष्ठता का उल्लंघन किया गया था। 3. न्यायिक दिशा-निर्देशों का पालन मुख्य सचिव की नियुक्ति में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का भी पालन करना आवश्यक होता है। • निर्वाचित सरकार के निर्देश: 8 दिसंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में यह स्पष्ट किया था कि भले ही मुख्य सचिव की नियुक्ति केंद्र सरकार करती है, लेकिन कुछ विषयों पर निर्वाचित सरकार के निर्देशों का भी पालन करना होगा। संक्षेप में, मुख्य सचिव की नियुक्ति प्रक्रिया वरिष्ठता का पैनल भेजने से शुरू होती है, लेकिन इसका अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री की इच्छा और सरकार के राजनीतिक समीकरणों पर अत्यधिक निर्भर करता है, जबकि सेवा रिकॉर्ड और केंद्रीय परामर्श भी महत्वपूर्ण होते हैं।

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