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राजस्थान राज्यसभा चुनाव:

राजस्थान राज्यसभा चुनाव: एक सीट पर सियासी घमासान राजस्थान में तीन राज्यसभा सीटों के लिए घमासान, कांग्रेस और बीजेपी प्रमुख दल कांग्रेस को एक सीट, बीजेपी को दो सीटें मिलने का अनुमान, चुनाव जून में एक सीट के लिए लगभग 41 वोटों की आवश्यकता कांग्रेस की एक सीट पर दावेदारों की लंबी कतार सीपी जोशी का नाम सबसे आगे, नीरज डांगी और पवन खेड़ा भी रेस में बाहरी बनाम स्थानीय नेताओं की बहस, अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व की मांग कांग्रेस आलाकमान पर अंतिम निर्णय, स्थानीय बनाम राष्ट्रीय नेता का सवाल चुनाव कार्यक्रम और संभावित असर 1 जून: अधिसूचना जारी, 8 जून: नामांकन की आखिरी तारीख 18 जून: मतदान, 18 जून शाम 5 बजे: मतगणना और परिणाम स्थानीय दावेदारों की अनदेखी कार्यकर्ताओं में निराशा पैदा कर सकती है सियासी घमासान, दावेदार और असर राजस्थान राज्यसभा चुनाव: एक सीट पर सियासी घमासान नमस्कार दोस्तों, सांगानेर केसरी चैनल में आपका स्वागत है। आज का हमारा विषय है राजस्थान की राजनीति, खासकर राज्यसभा चुनावों को लेकर जहाँ तीन सीटों के लिए घमासान मचने वाला है। यह देखना दिलचस्प होगा कि ये सीटें कैसे भरती हैं। नमस्कार जी। बिल्कुल। मैं मधु, आपकी दोस्त। इन चुनावों में कौन-कौन से प्रमुख दल मैदान में हैं और अभी तक सियासी समीकरण क्या बन रहे हैं? देखिए, प्रमुख रूप से कांग्रेस और बीजेपी ही मैदान में हैं। संख्या बल के आधार पर, कांग्रेस को एक सीट और बीजेपी को दो सीटें मिलना तय माना जा रहा है। ये चुनाव जून के महीने में होने हैं। अच्छा, तो एक सीट जीतने के लिए कितने वोटों की ज़रूरत होगी? यह जानना भी महत्वपूर्ण होगा कि किस उम्मीदवार को कितना समर्थन चाहिए। एक सीट जीतने के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को लगभग 41 वोटों की आवश्यकता होगी। यहीं पर रणनीति और विधायकों का समर्थन बहुत मायने रखता है। तो अब आते हैं कांग्रेस की उस एक सीट पर जिस पर दावेदारों की एक लंबी कतार है। इस बार पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी का नाम सबसे आगे चल रहा है। कांग्रेस की एक सीट पर दावेदारों की लंबी कतार हाँ, मैंने भी सुना है। सीपी जोशी का पलड़ा काफी भारी लग रहा है। लेकिन गहलोत खेमे से नीरज डांगी भी तो दोबारा दावेदारी कर रहे हैं, पिछली बार की तरह ही। बिल्कुल सही कहा। नीरज डांगी भी रेस में हैं, जो अशोक गहलोत के काफी करीबी माने जाते हैं। और सिर्फ यही नहीं, कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया और प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा का नाम भी इस बार चर्चा में है। अच्छा, पवन खेड़ा भी! तो क्या पार्टी बाहरी बनाम स्थानीय नेताओं की बहस में फिर से उलझ सकती है? पहले भी तो रणदीप सुरजेवाला और मुकुल वासनिक जैसे नेताओं को लेकर विरोध हुआ था। यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। पार्टी के भीतर अक्सर बाहरी नेताओं को टिकट दिए जाने पर स्थानीय नेताओं से विरोध होता रहा है। पिछली बार भी ऐसा देखने को मिला था। इस बार भी यह एक चुनौती हो सकती है। और क्या अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व को लेकर भी कोई मांग उठ रही है? जी हाँ। मुस्लिम समाज भी इस एक सीट के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहा है। उनकी मांग है कि उन्हें प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, खासकर जब कांग्रेस की पिछली सरकार में उनका बड़ा समर्थन रहा है। तो, अब हम बात करते हैं कि इन सब दावेदारियों और मांगों के बीच, इस पूरी प्रक्रिया में अंतिम निर्णय कौन लेगा। राज्यसभा उम्मीदवार का चयन पूरी तरह से कांग्रेस आलाकमान के हाथ में होगा। तो फिर उनके सामने मुख्य विचार क्या होंगे? क्या वे किसी स्थानीय चेहरे को प्राथमिकता देंगे या फिर किसी राष्ट्रीय नेता को राजस्थान से भेजेंगे? यही सबसे बड़ा सवाल है। पार्टी को यह तय करना होगा कि क्या किसी ऐसे स्थानीय नेता पर दांव लगाया जाए, जिसकी राज्य में मजबूत पकड़ हो, या फिर किसी राष्ट्रीय नेता को चुना जाए। उन्हें 2022 के पिछले अनुभव को भी ध्यान में रखना होगा, जब बाहरी उम्मीदवारों को लेकर काफी विवाद हुआ था। चुनाव कार्यक्रम और संभावित असर मुझे याद है, उस समय काफी हलचल हुई थी। तो इस फैसले का राजस्थान में कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर क्या असर पड़ेगा? निश्चित तौर पर, इसका सीधा असर पड़ेगा। अगर स्थानीय दावेदारों की अनदेखी की जाती है, तो कार्यकर्ताओं में निराशा हो सकती है और यह पार्टी की एकजुटता के लिए भी एक चुनौती बन सकता है। आलाकमान को बहुत सोच-समझकर फैसला लेना होगा। चलो चुनाव कार्यक्रम भी बता देते हैं। 01 जून को अधिसूचना जारी होने के साथ नामांकन दाखिल होना शुरू होंगे। 08 जून नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख होगी। 09 जून को नामांकनों की जांच होगी और 11 जून तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। 18 जून को सुबह 9:00 से लेकर दोपहर बाद 4:00 तक वोटिंग होगी। 18 जून को शाम 5:00 बजे वोटों की गिनती होगी और परिणाम घोषित किए जाएंगे।

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