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साहित्य अकादमी पुरस्कार में राजस्थानी की चमक

साहित्य अकादमी प्रतिष्ठित पुरस्कार

जयपुर के जिला कलेक्टर और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी को साहित्य अकादमी प्रतिष्ठित पुरस्कार उनके राजस्थानी कहानी संग्रह 'भरखमा' के लिए दिया गया है, जो ग्रामीण जीवन और सामाजिक यथार्थ पर आधारित है। उल्लेखनीय है कि उनकी इस प्रशंसित साहित्यिक कृति पर एक राजस्थानी फिल्म का निर्माण भी हो चुका है। इसके साथ ही, लेख में ममता कालिया और नवतेज सरना जैसे अन्य प्रमुख लेखकों को भी विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कृत किए जाने का उल्लेख है। यह आयोजन न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि को दर्शाता है, बल्कि राजस्थानी भाषा और भारतीय साहित्य की समृद्धि को भी राष्ट्रीय मंच पर बढ़ावा देता है। पुरस्कार वितरण समारोह 31 मार्च को नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।

डॉ. जितेंद्र सोनी और 'भरखमा' को साहित्य अकादमी पुरस्कार आज राजस्थानी भाषा की वो खिड़की खोलते हैं, जिससे न सिर्फ एक किताब, बल्कि पूरे सांस्कृतिक परिवेश की ताजगी झांकती है। डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी के साहित्यिक योगदान और उनकी प्रमुख कृतियों कहानी संग्रह 'भरखमा' के मुख्य विषयों और इस पर बनी फिल्म की क्या विशेषताएं हैं? डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी होने के साथ-साथ एक अत्यंत संवेदनशील साहित्यकार भी हैं, जो वर्तमान में जयपुर के जिला कलेक्टर के रूप में कार्यरत हैं उनके साहित्यिक सफर और कृतियों का विवरण प्रमुख उपलब्धि और 'भरखमा'साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025: डॉ. सोनी को उनके राजस्थानी कहानी संग्रह 'भरखमा' के लिए प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार देने की घोषणा की गई है डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी की कहानियों, विशेष रूप से उनके चर्चित संग्रह 'भरखमा' में, कई महत्वपूर्ण सामाजिक और मानवीय मुद्दों को गहराई से उकेरा गया है। स्रोतों के अनुसार, उनकी कहानियों में निम्नलिखित विषयों को प्रमुखता दी गई है: ग्रामीण परिवेश और सामाजिक यथार्थ: उनकी कृतियाँ मुख्य रूप से ग्रामीण परिवेश पर आधारित हैं, जहाँ वे समाज के कड़वे यथार्थ को बहुत ही जीवंत और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हैं । आम जनजीवन की पीड़ा और संघर्ष: डॉ. सोनी की कहानियों के केंद्र में आम आदमी के जीवन का संघर्ष और उसकी पीड़ा रहती है । वे एक संवेदनशील साहित्यकार के रूप में समाज के साधारण वर्ग की समस्याओं को स्वर देते हैं । सांस्कृतिक और मानवीय मूल्य: उनकी रचनाओं में भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं की स्पष्ट झलक मिलती है । लोक जीवन और सामाजिक सरोकार: उनके लेखन में राजस्थान की मिट्टी की खुशबू रची-बसी है, जिसमें लोक जीवन की गहराई और विभिन्न सामाजिक सरोकारों को प्रमुखता से दर्शाया गया है । कुल मिलाकर, उनकी कहानियाँ समाज के यथार्थ दर्पण के रूप में कार्य करती हैं, जो पाठकों को ग्रामीण भारत की वास्तविकताओं और वहां के जनजीवन की संवेदनाओं से जोड़ती हैं , । यह सम्मान उन्हें 31 मार्च 2026 को नई दिल्ली में एक समारोह के दौरान प्रदान किया जाएगा । विषय वस्तु:
'भरखमा' ग्रामीण परिवेश, जीवन के संघर्षों और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है । इसमें आम जनजीवन की पीड़ा, संवेदनाओं और सामाजिक यथार्थ का जीवंत चित्रण किया गया है

अन्य प्रमुख कृतियाँ

डॉ. सोनी का साहित्यिक सफर काफी समृद्ध रहा है। 'भरखमा' के अलावा उनकी अन्य प्रमुख रचनाओं में निम्नलिखित कहानी संग्रह शामिल हैं:
चिराग
रेगमाल
रणखार
यादावरी
आपणा रूंख
म्हारै पांती रा पानी

लेखन शैली और विशेषताएँ

डॉ. सोनी के लेखन में राजस्थान की मिट्टी की खुशबू, लोक जीवन की गहराई और सामाजिक सरोकारों की स्पष्ट झलक मिलती है । वे अपनी मातृभाषा राजस्थानी के प्रति गहरा लगाव रखते हैं। उनका मानना है कि राजस्थानी भाषा का इतिहास, व्याकरण और शब्दकोश अत्यंत समृद्ध है और वे अपनी भाषा की प्रतिष्ठा को विश्व स्तर पर बढ़ते हुए देखना चाहते हैं । डॉ. सोनी का मानना है कि यह पुरस्कार न केवल उनकी कृति का सम्मान है, बल्कि राजस्थानी भाषा और साहित्य को राष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाली एक नई पहचान है

कहानी संग्रह 'भरखमा' के मुख्य विषय और इस पर बनी फिल्म का विवरण

डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी के कहानी संग्रह 'भरखमा' के मुख्य विषय और इस पर बनी फिल्म का विवरण निम्नलिखित है:
'भरखमा' के मुख्य विषय
यह कहानी संग्रह अपनी गहरी संवेदनाओं और यथार्थ चित्रण के लिए जाना जाता है। :
ग्रामीण परिवेश:
यह कृति मुख्य रूप से राजस्थान के ग्रामीण अंचल और वहाँ के परिवेश को आधार बनाकर लिखी गई है । जीवन का संघर्ष:
इसमें आम आदमी के जीवन में आने वाली कठिनाइयों और उनके निरंतर संघर्षों को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया है । सांस्कृतिक मूल्य:
कहानियों के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है । सामाजिक यथार्थ और संवेदनाएं:
डॉ. सोनी ने इसमें आम जनजीवन की पीड़ा, मानवीय संवेदनाओं और समाज के कड़वे यथार्थ को बहुत ही बारीकी से उकेरा है

फिल्म का विवरण विशेष बात यह है कि इस कहानी संग्रह पर आधारित एक राजस्थानी फिल्म भी बनाई जा चुकी है । फिल्म से जुड़े मुख्य विवरण इस प्रकार हैं: निर्देशन: इस फिल्म का निर्देशन श्रवण सागर ने किया है । अभिनय: फिल्म में मुख्य भूमिका (एक्टर) भी श्रवण सागर ने ही निभाई है । सराहना और पुरस्कार: इस फिल्म को विभिन्न सार्वजनिक मंचों और प्रतिष्ठित फिल्म फेस्टिवल्स में काफी सराहा गया है और इसने कई पुरस्कार भी अपने नाम किए हैं । 'भरखमा' की सफलता और इस पर मिली राष्ट्रीय पहचान (साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025) ने न केवल डॉ. सोनी के लेखन को, बल्कि राजस्थानी सिनेमा और साहित्य को भी एक नई ऊंचाई दी है

साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025 के अन्य विजेताओं और श्रेणियों की जानकारी

साहित्य अकादमी ने वर्ष 2025 के लिए 24 भारतीय भाषाओं में अपने वार्षिक पुरस्कारों की घोषणा की है
। इस वर्ष के पुरस्कारों में विभिन्न साहित्यिक श्रेणियों को शामिल किया गया है, जिनका विवरण नीचे दिया गया है:
पुरस्कारों की श्रेणियाँ
वर्ष 2025 में कुल 24 भाषाओं में विजेताओं का चयन किया गया है, जिनमें निम्नलिखित विधाएं शामिल हैं
काव्य संग्रह: 8
लघु कथाएं: 6 (इसमें डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी का राजस्थानी संग्रह 'भरखमा' भी शामिल है)
उपन्यास: 4
निबंध: 2
संस्मरण: 2
साहित्यिक आलोचना: 1
आत्मकथा: 1
प्रमुख विजेता और उनकी कृतियाँ

डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी के अलावा कुछ अन्य प्रमुख विजेता इस प्रकार हैं:
ममता कालिया (हिंदी): उन्हें उनके संस्मरण 'जीते जी इलाहाबाद' के लिए सम्मानित किया जाएगा
नवतेज सरना (अंग्रेजी): प्रख्यात राजनयिक नवतेज सरना को उनके उपन्यास 'क्रिमसन स्प्रिंग' के लिए पुरस्कार दिया जाएगा
। प्रीतपाल सिंह बेताब (उर्दू): उनकी कविता 'सफर जारी है' को इस सम्मान के लिए चुना गया है
। अन्य चयनित लेखक: पुरस्कार पाने वाले अन्य लेखकों में देवब्रत दास, प्रसून बंद्योपाध्याय, खजूर सिंह ठाकुर और योगेश वैद्य के नाम भी शामिल हैं
। पुरस्कार का स्वरूप और समारोह
पुरस्कार राशि: सभी विजेताओं को एक लाख रुपए की नकद राशि प्रदान की जाएगी
। सम्मान प्रतीक: विजेताओं को एक नक्काशीदार तांबे की पट्टिका भी भेंट की जाएगी
। समारोह: यह पुरस्कार समारोह 31 मार्च 2026 को नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा

डॉ. सोनी को साहित्य अकादमी पुरस्कार कब और कहाँ दिया जाएगा?

जितेंद्र कुमार सोनी को साहित्य अकादमी पुरस्कार 31 मार्च 2026 को प्रदान किया जाएगा । यह सम्मान समारोह नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा
  • डॉ. सोनी की अन्य पुस्तकों जैसे 'रणखार' और 'रेगमाल' के बारे में बताएं।
  • 'रणखार' और 'रेगमाल' डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी के प्रमुख कहानी संग्रह हैं, जो उनके उल्लेखनीय साहित्यिक सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं इन कृतियों की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
  • साहित्यिक शैली:
  • विषय वस्तु:
  • अन्य कृतियां:
  • राजस्थानी भाषा के प्रति डॉ. सोनी के क्या विचार हैं?
  • क्या डॉ. सोनी ने अपनी मातृभाषा के लिए कोई विशेष संदेश दिया है?
  • फिल्म 'भरखमा' के निर्देशक और कलाकार कौन हैं?
  • साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025 की घोषणा कब की गई थी?

इनके लेखन में राजस्थान की मिट्टी की खुशबू, लोक जीवन की गहराई और सामाजिक सरोकारों की स्पष्ट झलक देखने को मिलती है
: । एक संवेदनशील साहित्यकार के रूप में डॉ. सोनी ने इन संग्रहों के माध्यम से आम जनजीवन की पीड़ा, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक यथार्थ को जीवंत रूप में उकेरा है
'रणखार' और 'रेगमाल' के अलावा उनके अन्य चर्चित कहानी संग्रहों में 'चिराग', 'यादावरी', 'आपणा रूंख' और 'म्हारै पांती रा पानी' शामिल हैं
। डॉ. सोनी की ये रचनाएं न केवल पाठकों को राजस्थान के ग्रामीण और लोक जीवन से जोड़ती हैं, बल्कि समाज की वास्तविक परिस्थितियों का प्रभावी चित्रण भी करती हैं , राजस्थानी भाषा के प्रति डॉ. सोनी के क्या विचार हैं?

राजस्थानी भाषा के प्रति डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी के विचार अत्यंत गहरा लगाव, गौरव और सम्मान प्रदर्शित करते हैं। स्रोतों के अनुसार, उनके विचार निम्नलिखित बिंदुओं में स्पष्ट होते हैं: समृद्ध विरासत: डॉ. सोनी का मानना है कि राजस्थानी भाषा का इतिहास, व्याकरण, शब्दकोश और साहित्य का भंडार अत्यंत समृद्ध है । वे इस भाषा को उस मिट्टी की मिठास मानते हैं जिसने उनके कानों में मिश्री घोलने का काम किया है । कृतज्ञता का भाव:
वे अपनी मातृभाषा के प्रति इतने समर्पित हैं कि उन्होंने अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार उन सभी लोगों को समर्पित किया है जिनसे उन्होंने राजस्थानी भाषा का ककहरा (प्रारंभिक ज्ञान) सीखा । व्यावहारिक उपयोग पर बल:
उनका यह स्पष्ट आह्वान है कि हमें अपनी भाषा को सम्मान देना चाहिए । वे चाहते हैं कि राजस्थानी भाषा केवल बोलचाल तक सीमित न रहकर व्यवहार और व्यापार की भाषा भी बनी रहे । वैश्विक प्रतिष्ठा की कामना:
डॉ. सोनी की यह हार्दिक इच्छा है कि दुनिया की अन्य समृद्ध भाषाओं की तरह राजस्थानी भाषा की प्रतिष्ठा भी दिन-दूनी, रात-चौगुनी बढ़ती रहे । उनके लेखन में राजस्थान की मिट्टी की खुशबू और लोक जीवन की गहराई की जो झलक मिलती है, वह राजस्थानी भाषा और संस्कृति के प्रति उनकी इसी अटूट निष्ठा का प्रमाण है । क्या डॉ. सोनी ने अपनी मातृभाषा के लिए कोई विशेष संदेश दिया है?
डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी ने अपनी मातृभाषा राजस्थानी के प्रति गहरा प्रेम व्यक्त करते हुए समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। इन स्रोतों के अनुसार, उन्होंने अपनी भाषा के सम्मान और उत्थान के लिए निम्नलिखित बातें कही हैं: भाषा को सम्मान देने का आह्वान: उन्होंने सभी से अपील की है कि "आइए, हम सब अपनी भाषा को सम्मान दें" । व्यावहारिक उपयोग पर बल:
उनकी यह हार्दिक इच्छा है कि राजस्थानी भाषा केवल भावनाओं तक सीमित न रहे, बल्कि यह व्यवहार और व्यापार की भाषा भी बनी रहे । वैश्विक प्रतिष्ठा की कामना:
डॉ. सोनी ने कामना की है कि दुनिया की अन्य समृद्ध भाषाओं की तरह राजस्थानी की प्रतिष्ठा भी दिन-दूनी, रात-चौगुनी बढ़ती रहे । कृतज्ञता और समर्पण:
उन्होंने राजस्थानी भाषा के समृद्ध इतिहास, व्याकरण और शब्दकोश की सराहना की है । साथ ही, उन्होंने अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार उन सभी लोगों को समर्पित किया जिनसे उन्होंने इस भाषा का 'ककहरा' (प्रारंभिक ज्ञान) सीखा
। उनका संदेश स्पष्ट है कि अपनी जड़ों और मातृभाषा से जुड़ाव ही उसकी वास्तविक पहचान और प्रगति का आधार है
। फिल्म 'भरखमा' के निर्देशक और कलाकार कौन हैं? डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी के कहानी संग्रह पर आधारित फिल्म 'भरखमा' के निर्देशक और मुख्य कलाकार के बारे में जानकारी निम्नलिखित है: निर्देशक: इस राजस्थानी फिल्म का निर्देशन श्रवण सागर ने किया है । कलाकार: फिल्म में मुख्य भूमिका भी श्रवण सागर ने ही निभाई है (श्रवण सागर अभिनीत) । इस फिल्म को विभिन्न मंचों और फिल्म फेस्टिवल्स में काफी सराहना मिली है और इसने कई पुरस्कार भी प्राप्त किए हैं । फिल्म 'भरखमा' को किन फिल्म फेस्टिवल्स में पुरस्कार मिले हैं?

_‘भरखमा’_ राजस्थानी साहित्य को राष्ट्रीय पहचान
  • 00:00 00:55 साहित्य अकादमी पुरस्कार में राजस्थानी की चमक
  • 01:31 ‘भरखमा’ का असली स्वरूप: फिल्म नहीं, कहानी!
  • 01:56 राजस्थानी साहित्य की ऐतिहासिकता और आज की ज़रूरत
  • 02:22 ग्रामीण जीवन: सतह के पार की कहानियां
  • 02:58 जगह, पात्र और भाषा की अनूठी भूमिका
  • 03:22 सम्मान का असर: नई पीढ़ी, नई उम्मीद
  • 03:45 ‘भरखमा’ की पहचान: निष्कर्ष और आगे का कदम
script podcast राजस्थानी साहित्य की राष्ट्रीय मंच पर गूंज Trustworthy Advisor कल्पना कीजिए, एक ऐसी किताब जो सिर्फ किताब नहीं, बल्कि पूरी भाषा की धड़कन बन जाती है—क्या वाकई एक संग्रह ऐसा असर छोड़ सकता है? नमस्कार, मैं सिसौदिया हूं, और आज हमारे साथ. Tranquil Woman आपकी बात की दिशा में ही मैं भी शामिल हूं। और मैं भी इसी सवाल से उत्साहित हूं—आज चर्चा करेंगे साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025 की, खासकर राजस्थानी किताब ‘भरखमा’ की। Trustworthy Advisor बिल्कुल, आप सुनने जा रहे हैं ‘भरखमा’ के चयन की कहानी, राजस्थानी साहित्य की ताकत, गांव की आवाज़ का महत्व, और आखिरकार, इस उपलब्धि का व्यापक असर—यानी सिर्फ लेखक नहीं, पूरी भाषा का उत्सव। Tranquil Woman तो चलिए, आज राजस्थानी भाषा की वो खिड़की खोलते हैं, जिससे न सिर्फ एक किताब, बल्कि पूरे सांस्कृतिक परिवेश की ताजगी झांकती है। 00:55 साहित्य अकादमी पुरस्कार में राजस्थानी की चमक Trustworthy Advisor जब 24 भाषाओं की सूची आती है, तो लगता है जैसे भारत सचमुच एक विशाल घर है—हर कमरे की अपनी कहानी। इस बार ‘भरखमा’ ने राजस्थानी को उस घर में नई पहचान दी है। Tranquil Woman मुझे भी यही लगता है कि जब कोई कहानी-संग्रह, वो भी राजस्थानी में, इतनी ऊँचाई पर पहुंचता है, तो वो सिर्फ टिक-मार्क नहीं है। असल में ये उन गांवों की, चौपालों की, और रास्तों की कहानी को सुनने का मौका है, जो अक्सर अनसुनी रह जाती हैं। Trustworthy Advisor और यही फर्क है—ये सिर्फ किताब नहीं, पूरे अनुभव की मान्यता है। 01:31 ‘भरखमा’ का असली स्वरूप: फिल्म नहीं, कहानी! Trustworthy Advisor एक बात तो साफ कर दूँ—‘भरखमा’ कोई फिल्म नहीं, बल्कि कहानी-संग्रह है। अकसर लोग टाइटल देखकर कन्फ्यूज हो जाते हैं, लेकिन यहां असल ताकत कहानी में है, उसकी भाषा में है। Tranquil Woman बहुत जरूरी क्लैरिटी है ये। क्योंकि जब तक यह समझ में नहीं आएगा कि केंद्र में शब्द और अनुभव हैं, तब तक उसके महत्व को महसूस करना मुश्किल है। 01:56 राजस्थानी साहित्य की ऐतिहासिकता और आज की ज़रूरत Trustworthy Advisor राजस्थानी साहित्य वैसे तो सदियों से अपनी समृद्ध परंपरा और लोक-संसार के साथ मौजूद रहा है, लेकिन हर बार राष्ट्रीय मंच पर ऐसी जगह मिलना बड़ा इत्तफाक है। Tranquil Woman मुझे लगता है, जब ‘भरखमा’ जैसा संग्रह चुना जाता है तो पूरे प्रदेश को लगता है कि हमारे अनुभव भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं—परंपरा, संघर्ष और आधुनिकता सब कुछ साथ लेकर। 02:22 ग्रामीण जीवन: सतह के पार की कहानियां Trustworthy Advisor अब अगर ‘भरखमा’ को करीब से देखें, तो इसकी खासियत गांव का जीवन है। लेकिन गांव सिर्फ लोकेशन नहीं—वो सोच, रिश्ते और रोजमर्रा की जद्दोजहद का नाम है। Tranquil Woman सही कहा आपने। अक्सर साहित्य में गांव को postcard की तरह पेश किया जाता है, लेकिन ‘भरखमा’ की कहानियां उस पोस्टकार्ड के पीछे की असलियत—थकान, संघर्ष, और मानवीय उलझनें—बहुत सहजता से दिखाती हैं। Trustworthy Advisor और यही सबसे बड़ी बात है—कहानी में भारी शब्दों की जगह, जीवन की असल महक और सच्चाई घुली रहती है, जो इसे खास बनाती है। 02:58 जगह, पात्र और भाषा की अनूठी भूमिका Trustworthy Advisor ‘मिट्टी की महक’ जैसे जुमले कभी-कभी cliché लगते हैं, लेकिन यहाँ वाकई फिट बैठते हैं—‘भरखमा’ में जगह खुद एक पात्र की तरह सामने आती है। Tranquil Woman बिल्कुल, और यही तो गहराई है। जब हवा, रीति, भाषा और चुप्पियां भी कहानी में भागीदार हों, तो पाठक को सिर्फ़ कथानक नहीं, पूरा समाज और संस्कृति महसूस होती है। 03:22 सम्मान का असर: नई पीढ़ी, नई उम्मीद Trustworthy Advisor पुरस्कार अक्सर देर से आते हैं, लेकिन जब आते हैं तो जैसे पूरी मेहनत की पीठ थपथपाते हैं—खासकर ऐसे प्रदेश में, जहाँ लोककला और मौखिक परंपरा गहरी है। Tranquil Woman मुझे लगता है, ये सिर्फ एक लेखक का सम्मान नहीं; इससे युवा लेखकों को भी प्रेरणा मिलती है कि अपनी भाषा में लिखना गर्व की बात है, और किसी छोटे दायरे तक सीमित नहीं है। 03:45 ‘भरखमा’ की पहचान: निष्कर्ष और आगे का कदम Trustworthy Advisor आज की बातचीत से तीन बातें बिल्कुल साफ निकलकर आती हैं—पहली, क्षेत्रीय भाषा में पनपी संवेदनाएं भी राष्ट्रीय मंच पर उतनी ही असरदार होती हैं; दूसरी, ‘भरखमा’ ने राजस्थानी की आधुनिकता और प्रासंगिकता को साबित किया; तीसरी, पुरस्कार पाठकों और लेखकों दोनों के लिए प्रेरणा है। Tranquil Woman अगर अगला कदम उठाना है, तो मेरा सुझाव रहेगा—राजस्थानी की ऐसी किताबें खोजिए, पढ़िए और अपने आस-पास के लोगों को भी पढ़ने के लिए प्रोत्साहित कीजिए। भाषा तभी जीवित रहती है जब हम उसमें संवाद करते हैं—कहानियों के जरिए, अनुभवों के जरिए। Trustworthy Advisor तो इसी प्रेरणा के साथ, हम आपसे विदा लेते हैं। अगली बार किसी नई किताब, नई भाषा या नई आवाज़ के साथ फिर मिलेंगे। धन्यवाद!

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